जयपुर। Ajmer Jail Murder Case: अजमेर की घूघरा हाई सिक्योरिटी जेल में डकैत जगन गुर्जर की हत्या मामले में मुख्य आरोपी विष्णु सिंह जाट ने पुलिस पूछताछ में कई अहम दावे किए हैं। पुलिस के अनुसार, विष्णु ने हत्या की जिम्मेदारी अकेले लेने की बात कही है। उसने बताया कि जगन गुर्जर की ओर से लगातार छींटाकशी और चोरी के मामलों को लेकर ताने मारने से वह परेशान था। इसी रंजिश में उसने 29 जून को वारदात को अंजाम दिया।
सिविल लाइंस थाना पुलिस ने प्रोडक्शन वारंट पर विष्णु सिंह जाट को गिरफ्तार कर हाई सिक्योरिटी जेल में ही घटनास्थल का सीन रीक्रिएशन कराया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने हत्या में इस्तेमाल गमछा अपना बताया है, जिसे जब्त कर लिया गया है। हालांकि पुलिस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है और अन्य बंदियों की भूमिका को लेकर भी जांच जारी है।
लूडो खेलते समय बनाया हत्या का प्लान
पुलिस जांच के अनुसार, 29 जून को दोपहर 12 बजे के बाद विष्णु और जगन एक ही सेल में आमने-सामने बैठकर लूडो खेल रहे थे। विष्णु जगन को दादा कहकर बुलाता था। पूछताछ में विष्णु ने बताया कि खेल के दौरान उसने टैबलेट लेने का बहाना बनाया और दीवार पर टंगे बैग के पास पहुंच गया।
इसके बाद उसने अपने माथे पर बंधा गमछा खोला और पीछे से जगन के गले में डालकर कस दिया। आरोपी के कथित बयान के मुताबिक, उसने जगन को पीछे की तरफ खींचकर नीचे गिराया और फिर उसके ऊपर बैठकर गमछे का दूसरा फंदा गले में लपेट दिया। उसने करीब ढाई से तीन मिनट तक गमछे को कसकर पकड़े रखने का दावा किया है।
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पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गला घोंटने से मौत की पुष्टि
पुलिस जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में जगन गुर्जर की मौत गला घोंटने से होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में शरीर पर संघर्ष के ज्यादा निशान नहीं मिलने का भी उल्लेख है। इससे जांच एजेंसियां इस एंगल पर भी काम कर रही हैं कि जगन को बचाव का पर्याप्त मौका नहीं मिला या उसे पहले किसी तरह काबू में किया गया था।
आरोपी विष्णु ने पुलिस को यह भी बताया कि हत्या के बाद उसने बैडशीट और गमछे की मदद से जगन को पंखे पर लटकाकर फंदे का रूप देने की कोशिश की थी, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो पाया। इसके बाद वह बैरक में जाकर लेट गया।
इंजेक्शन के बाद हत्या का समय, पुलिस जोड़ रही कड़ियां
पुलिस के अनुसार, दोपहर करीब 12 से 12:30 बजे के बीच एक कंपाउंडर जगन की सेल में पहुंचा था और इंजेक्शन देकर चला गया था। इसके बाद करीब एक से डेढ़ बजे के बीच हत्या होने की आशंका जताई जा रही है।
जांच में सामने आया कि इस दौरान एक प्रहरी ने सेल के भीतर देखा था। उस समय जगन अपने बिस्तर पर सोता हुआ दिखाई दिया, जबकि विष्णु पास में लेटा हुआ था। दोपहर 2 बजकर 54 मिनट पर सेल दोबारा खोली गई। अब पुलिस इंजेक्शन, वारदात के समय और अन्य परिस्थितियों को जोड़कर पूरी टाइमलाइन तैयार कर रही है।
सीसीटीवी कैमरे पर टूथपेस्ट लगाने का एंगल भी जांच में
इस मामले में सीसीटीवी कैमरों के लेंस पर टूथपेस्ट लगाने का एंगल भी जांच के दायरे में है। सीन रीक्रिएशन के दौरान पुलिस ने यह परीक्षण किया कि क्या आरोपी टॉयलेट की दीवार पर चढ़कर कैमरे के लेंस पर टूथपेस्ट लगा सकता था। पुलिस के अनुसार, ऐसा किया जाना संभव पाया गया।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या वारदात से पहले निगरानी व्यवस्था को जानबूझकर प्रभावित किया गया था। सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
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दूसरे बंदियों से भी होगी पूछताछ
पुलिस का कहना है कि अभी तक किसी दूसरे बंदी की आपराधिक भूमिका का ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है। फिर भी वार्ड-2 के ब्लॉक नंबर-4 में घटना वाले दिन मौजूद अन्य बंदियों से पूछताछ के लिए अदालत में प्रार्थना पत्र पेश किया गया है। कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद उनके बयान दर्ज किए जाएंगे।
विष्णु सिंह जाट को मेडिकल के बाद कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। पहले उसे अजमेर सेंट्रल जेल में दाखिल कराया गया, लेकिन सुरक्षा कारणों के चलते बाद में उसे फिर हाई सिक्योरिटी जेल में ट्रांसफर कर दिया गया।
हाथ में गोली लगने के बावजूद सक्षम होने का दावा
विष्णु के बाएं हाथ को लेकर भी सवाल उठे थे, क्योंकि कुलदीप जघीना हत्याकांड के दौरान उसके हाथ में गोली लगी थी। थानाप्रभारी शंभू सिंह शेखावत ने कहा कि घाव अभी पूरी तरह नहीं भरा है और दर्द होने पर विष्णु दवा लेता है, लेकिन उसका हाथ काम करने में सक्षम है और वह शारीरिक रूप से स्वस्थ है।
पुलिस के मुताबिक, जगन गुर्जर की हत्या विष्णु के खिलाफ दर्ज सातवां आपराधिक मामला है। उसके खिलाफ कुलदीप जघीना हत्याकांड, दो मारपीट के मामले, धोखाधड़ी, दो वाहन चोरी और अन्य मामले दर्ज बताए गए हैं।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या यह हत्या केवल छींटाकशी और अपमान की रंजिश का नतीजा थी, या फिर हाई सिक्योरिटी जेल के भीतर इस वारदात की कोई दूसरी परत भी मौजूद है। पुलिस ब्लॉक के अन्य बंदियों के बयान, सीसीटीवी फुटेज और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है।



