नई दिल्ली (प्रज्ञा पांडे)। करीब दो हफ्तों तक चले CJP के NEET पेपर लीक विवाद समेत मांगो पर हुए आंदोलन के बाद आखिरकार प्रदर्शन खत्म हो गया। छात्रों की प्रमुख मांगों पर सरकार ने कदम उठाने का भरोसा दिया, जबकि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। आंदोलन थमने के बाद अब अभिनेता अनुपम खेर का एक बयान चर्चा में है, जिसमें उन्होंने विरोध के दौरान इस्तेमाल की गई भाषा पर सवाल उठाए हैं। छात्र आंदोलन खत्म होने के बाद अभिनेता अनुपम खेर ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से एक वीडियो पोस्ट करते हुए उन्होंने लोकतंत्र, असहमति और विरोध की भाषा पर अपनी बात रखी। उन्होंने छात्रों के आंदोलन को लोकतंत्र की ताकत बताया, लेकिन साथ ही कहा कि प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया, उसने उन्हें भीतर तक आहत किया। अनुपम खेर ने कहा कि किसी भी सरकार या नेता से असहमति रखना लोकतंत्र का हिस्सा है। नीतियों पर सवाल उठाना और आलोचना करना हर नागरिक का अधिकार है। लेकिन जब बहस की जगह गालियां ले लेती हैं, तो मुद्दा पीछे छूट जाता है और केवल शोर रह जाता है।
उन्होंने अपने इंस्टाग्राम वीडियो में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दशक से सार्वजनिक जीवन में हैं और देश की जनता उन्हें कई बार जनादेश दे चुकी है। ऐसे में उनके हर फैसले से सहमत होना जरूरी नहीं है, लेकिन किसी भी निर्वाचित पद की गरिमा का सम्मान होना चाहिए। अनुपम खेर ने यह भी कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि विरोध की भाषा सिर्फ कुछ युवाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि हर उम्र और हर वर्ग के लोग इसमें शामिल रहे। उनके मुताबिक, अगर बड़े ही मर्यादा भूल जाएंगे तो आने वाली पीढ़ी से बेहतर भाषा की उम्मीद करना मुश्किल होगा।
हाल ही के छात्र आंदोलन के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक टास्क फोर्स बनाने और सख्त कानून लाने का ऐलान किया। इससे पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की। इस छात्र आंदोलन पर फिल्म इंडस्ट्री के कई कलाकारों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया, जबकि अनुपम खेर ने आंदोलन के अधिकार का सम्मान करते हुए विरोध की भाषा और सार्वजनिक संवाद में मर्यादा बनाए रखने पर जोर दिया।



