नई दिल्ली। महिला आरक्षण विधेयक को लेकर संसद में राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस ने आज भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार पर निशाना साधते हुए इस पहल के समय और उद्देश्य पर गंभीर सवाल उठाए।
लोकसभा में चर्चा के दौरान पार्टी की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि जिस समय देश के विभिन्न राज्यों में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं, उसी दौरान इस तरह के महत्वपूर्ण विधेयक को लाना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है। उनके मुताबिक, यह कदम राजनीतिक लाभ हासिल करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
दस्तीदार ने आशंका जताई कि प्रस्तावित परिसीमन आयोग को अत्यधिक शक्तियां मिल सकती हैं, जिससे उसकी कार्यप्रणाली को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रश्न उठ सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को स्पष्ट और संतुलित बनाए रखना आवश्यक है ताकि चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता बनी रहे।
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तृणमूल कांग्रेस ने यह भी कहा कि सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर अचानक सक्रिय हुई है, जबकि इससे पहले इस दिशा में ठोस पहल नहीं दिखी। पार्टी का आरोप है कि इस विषय को जल्दबाजी में आगे बढ़ाकर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए उचित नहीं है।
साथ ही, दस्तीदार ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों पर सरकार की प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठाए और कहा कि ऐसे मुद्दों पर पहले सख्त रुख अपनाया जाना चाहिए था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के सिद्धांत के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका समर्थन करती है।
उन्होंने बताया कि तृणमूल कांग्रेस में पहले से ही महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया गया है और पार्टी इस हिस्सेदारी को बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक ले जाने की पक्षधर है। उनके अनुसार, महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए ठोस और दीर्घकालिक कदम उठाना अधिक जरूरी है, न कि केवल राजनीतिक समयबद्धता के आधार पर निर्णय लेना।



