नई दिल्ली (प्रज्ञा पांडे)। NEET पेपर लीक विवाद को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब सिर्फ विपक्ष बनाम सरकार की राजनीतिक लड़ाई तक सीमित नहीं रहा। इस पूरे घटनाक्रम में Gen-Z की भागीदारी चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है। खास बात यह है कि इस आंदोलन के बीच बीजेपी नेताओं के परिवारों से जुड़े कुछ युवाओं ने भी सवाल उठाए हैं। इनमें बीजेपी सांसदों और नेताओं के बच्चे शामिल हैं, जिन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपनी राय रखी और परीक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई।
ओडिशा से बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता सारंगी का सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में आया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर टिप्पणी की थी, जिसके बाद राजनीतिक हलकों में बहस शुरू हो गई। इस मामले के बाद अर्चिता का सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट करने की खबर भी सामने आई। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। पूर्व बीजेपी विधायक विक्रम सिंह की बेटी यशस्विनी राजे सिंह का नाम भी Gen-Z विरोध की आवाजों में शामिल किया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर अपनी नाराजगी जाहिर की। युवा पीढ़ी से जुड़े इन चेहरों का सामने आना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि आमतौर पर राजनीतिक परिवारों से आने वाले युवा अपनी पार्टी लाइन से अलग राय रखने से बचते हैं।
NEET पेपर लीक विवाद के बाद बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतरे। सोशल मीडिया ने इस आंदोलन को तेजी से फैलाने में अहम भूमिका निभाई। युवाओं की सबसे बड़ी मांग परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने की रही। इसी दौरान कई युवाओं ने यह मुद्दा उठाया कि पेपर लीक जैसी घटनाओं का असर सीधे उनके भविष्य पर पड़ता है। राजनीतिक परिवारों से आने वाले युवाओं का इस तरह सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखना सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, Gen-Z की राजनीति पुराने समीकरणों से अलग है। यह पीढ़ी मुद्दों, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर ज्यादा मुखर दिखाई दे रही है। NEET विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद यह आंदोलन और चर्चा में आ गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत के बाद आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम में बदलाव आया।



