Supreme Court On Pawan Khera: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी पर कई पासपोर्ट और विदेश में अघोषित संपत्तियां रखने के आरोपों से जुड़े मामले में अग्रिम जमानत मांगी है. न्यायमूर्ति जे.के. महेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने कांग्रेस नेता की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा. खेड़ा ने कहा कि यदि उन्हें दर्ज मामले में अग्रिम जमानत नहीं मिलती है, तो गिरफ्तारी पूर्व जमानत का पूरा उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।
पवनखेड़ा की तरफ से वकील ने दी ये दलील
खेड़ा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सुनवाई के विषय हैं और उन्हें गिरफ्तार कर अपमानित करना आवश्यक नहीं है. उन्होंने यह भी दलील दी कि उनके खिलाफ लगाई गई धाराओं में से कुछ जमानती हैं, जबकि अन्य में गिरफ्तारी की जरूरत नहीं है.
तुषार मेहता ने किया याचिका का विरोध
असम सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि खेड़ा ने मुख्यमंत्री की पत्नी के पासपोर्ट की फर्जी और छेड़छाड़ की गई प्रतियां पेश की हैं. उन्होंने कहा कि खेड़ा फरार हैं और वीडियो जारी कर रहे हैं और मुख्यमंत्री की पत्नी की कई नागरिकताएं होने के सभी आरोप गलत हैं. खेड़ा ने 24 अप्रैल के गुवाहाटी हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया गया था.
मामले में अब तक क्या हुआ ?
इन आरोपों के बाद मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा ने खेड़ा और अन्य के खिलाफ गुवाहाटी अपराध शाखा थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक मामले दर्ज कराए थे. इससे पहले तेलंगाना हाईकोर्ट ने खेड़ा को 7 दिन की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी लेकिन असम पुलिस ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. शीर्ष अदालत ने अंतरिम आदेश देते हुए ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी थी और खेड़ा को गुवाहाटी हाईकोर्ट जाने को कहा था.
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