नागौर। राजस्थान के नागौर जिले के छोटे से गांव ढेहरी की बेटी सुमन भांबू ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार उपलब्धि हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। मलेशिया के पेनांग में आयोजित 10वीं एशिया पैसिफिक डेफ शतरंज चैंपियनशिप-2026 की रैपिड मिक्स्ड टीम स्पर्धा में भारतीय टीम ने स्वर्ण पदक जीता। इस ऐतिहासिक सफलता में मूक-बधिर शतरंज खिलाड़ी सुमन भांबू ने अहम भूमिका निभाई। सुमन की इस उपलब्धि से नागौर जिले के जायल क्षेत्र और पूरे राजस्थान में खुशी की लहर है। उनकी सफलता मेहनत, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प की ऐसी मिसाल है, जो देशभर के युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
गांव ढेहरी से अंतरराष्ट्रीय शतरंज चैंपियनशिप तक का सफर
नागौर जिले के ढेहरी गांव में पली-बढ़ी सुमन भांबू ने अपनी प्रतिभा और निरंतर मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच तक अपनी पहचान बनाई है। सीमित संसाधनों और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने शतरंज के प्रति अपने जुनून को बनाए रखा। सुमन ने अपने प्रदर्शन से साबित किया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर अभ्यास के दम पर मुश्किल परिस्थितियों में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। मलेशिया में भारतीय टीम के लिए उनका योगदान राजस्थान के खेल जगत के लिए गर्व का विषय है।
किसान पिता ने पहचानी बेटी की प्रतिभा
सुमन भांबू के पिता प्रभुराम भांबू किसान हैं। खेती-किसानी से जुड़े परिवार में सुमन की शतरंज के प्रति रुचि को उनके पिता ने पहचाना और उसे आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। पिता के सहयोग और सुमन की मेहनत ने उनकी प्रतिभा को निखारने में अहम भूमिका निभाई। आज अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा बनकर सुमन ने अपने परिवार और गांव का नाम रोशन किया है।
मलेशिया में भारतीय टीम ने जीता स्वर्ण पदक
पेनांग में आयोजित 10वीं एशिया पैसिफिक डेफ शतरंज चैंपियनशिप-2026 की रैपिड मिक्स्ड टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम में सुमन भांबू के साथ पांच अन्य खिलाड़ी भी शामिल रहे।
भारतीय टीम के सदस्य:
- सुमन भांबू
- विवेक वाटपाडे
- अंकित गांगुली
- आशुतोष शुक्ला
- श्रेया वाईएस
- अम्बिका नागप्पा मसगी
टीम के शानदार प्रदर्शन ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत को गौरवान्वित किया। इस उपलब्धि के बाद नागौर जिले के ढेहरी गांव और जायल क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
राजस्थान के खिलाड़ियों के लिए बनीं प्रेरणा
सुमन भांबू की सफलता केवल एक पदक जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा है, जो शारीरिक चुनौतियों और सीमित संसाधनों के बावजूद खेलों में आगे बढ़ना चाहते हैं। उनकी उपलब्धि ने दिखाया है कि प्रतिभा को सही प्रोत्साहन, मेहनत और अवसर मिलें तो गांवों से निकले खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। नागौर की इस बेटी ने अपनी मेहनत से राजस्थान का मान बढ़ाया है। अब क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि सुमन भविष्य में भी शतरंज की दुनिया में नई उपलब्धियां हासिल कर भारत का तिरंगा इसी तरह ऊंचा रखेंगी।



