Sunday, November 1, 2026
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IAS शिखर अग्रवाल के खिलाफ अब प्रमोशन प्रकरण में शिकायत, रिव्यू DPC पर 100 करोड़ के अतिरिक्त बोझ का आरोप

IAS शिखर अग्रवाल के खिलाफ जल संसाधन विभाग की 2018 रिव्यू DPC को लेकर शिकायत की गई है। सेवानिवृत्त अभियंताओं के संगठन ने 100 करोड़ रुपये के अतिरिक्त सरकारी खर्च का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है। विला खरीद मामले में उनकी पत्नी IPS प्रशाखा माथुर भी APO हैं।

जयपुर। IAS शिखर अग्रवाल से जुड़े विला खरीद मामले के बीच अब जल संसाधन विभाग की वर्ष 2018 की रिव्यू DPC को लेकर भी सवाल उठे हैं। रिव्यू DPC से प्रभावित सेवानिवृत्त अभियंताओं के संगठन ने RTI के जरिए दस्तावेज जुटाने के बाद मुख्यमंत्री को शिकायत भेजी है। संगठन ने शिखर अग्रवाल सहित संबंधित अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र एजेंसी या न्यायिक स्तर पर जांच कराने की मांग की है।

संगठन के सदस्य सतनाम सिंह पुन्नी के मुताबिक, वर्ष 2012-13 से 2015-16 तक की विभागीय पदोन्नति समितियों (DPC) की समीक्षा के लिए 2018 में बोर्ड गठित किया गया था। उस समय शिखर अग्रवाल जल संसाधन विभाग में प्रमुख शासन सचिव के पद पर थे।

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रिव्यू DPC से 100 करोड़ के अतिरिक्त खर्च का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि रिव्यू DPC के जरिए 160 अपात्र अभियंताओं को पदोन्नति का लाभ दिया गया। संगठन का दावा है कि 50 अधिकारियों को एक साथ दो-दो पदोन्नतियां मिलने से वेतन और भत्तों के रूप में सरकारी खजाने पर करीब 100 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ा।

संगठन के अनुसार, रिव्यू DPC के बाद पदोन्नति पा चुके कुछ सेवानिवृत्त अभियंताओं को वापस सहायक अभियंता के पद पर कर दिया गया था। इस मामले में संगठन की ओर से हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की गई थी।

संगठन ने यह भी कहा है कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने 2021 और 2024 में विभाग से जांच के लिए पूर्वानुमोदन और तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन अब तक जवाब नहीं मिला है। ये आरोप संगठन की शिकायत पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

शिखर अग्रवाल के बाद पत्नी IPS प्रशाखा माथुर भी APO

विला खरीद प्रकरण में राज्य सरकार ने शिखर अग्रवाल के बाद उनकी पत्नी और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक डॉ. प्रशाखा माथुर को भी पदस्थापन आदेश की प्रतीक्षा में (APO) कर दिया है। शनिवार को जारी इस कार्रवाई के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो दोनों अधिकारियों और उनके परिवार से जुड़ी संपत्तियों की जांच कर रहा है।

एसीबी ने जांच की जिम्मेदारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भूपेन्द्र को सौंपी है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, डॉ. माथुर के नाम उदयपुर और अलवर के रिसॉर्ट में कुल 18 विला खरीदे जाने की जानकारी मिली है। जांच में इन संपत्तियों की खरीद, कीमत, भुगतान और आय के स्रोत की पड़ताल की जाएगी।

डॉ. माथुर राजस्थान पुलिस मुख्यालय में एडीजी आयोजना, आधुनिकीकरण एवं कल्याण के पद पर कार्यरत थीं। एसीबी यह भी जांच करेगी कि क्या दोनों अधिकारियों के पदीय दायित्वों के दौरान किसी निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया और संपत्तियों की खरीद में कोई अनियमितता हुई।

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परिजनों के नाम पर भी विला होने की जानकारी

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, अलवर के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में शिखर अग्रवाल के नाम आठ विला खरीदे जाने की बात सामने आई है। उनके दोनों बेटों के नाम चार और सास-ससुर के नाम भी चार विला होने की जानकारी दी गई है।

एसीबी इन संपत्तियों के दस्तावेज, भुगतान और रकम के स्रोत की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल की गई रकम कहां से आई और घोषित कीमतें वास्तविक बाजार मूल्य के अनुरूप थीं या नहीं।

उदयपुर में 10 और अलवर में 8 विला की जांच

एसीबी की शुरुआती जांच के अनुसार, उदयपुर के बुझड़ा स्थित अनंता रिसॉर्ट में मार्च 2026 के दौरान डॉ. प्रशाखा माथुर के नाम 10 विला खरीदे जाने की जानकारी मिली है। प्रत्येक विला की कीमत 15 लाख रुपये बताई गई है।

वहीं, अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में 16.5 लाख रुपये प्रति विला की दर से आठ विला खरीदे जाने की जानकारी सामने आई है। एसीबी के मुताबिक, दोनों अधिकारियों और उनके परिजनों के नाम खरीदे गए कुछ विला की कीमतें बाजार मूल्य से काफी कम दर्शाई गई थीं।

अब जांच में इन संपत्तियों के वास्तविक बाजार मूल्य, भुगतान के तरीके और रकम के स्रोत की पड़ताल की जाएगी। फिलहाल ये विवरण प्रारंभिक जांच और शिकायत में सामने आए आरोपों पर आधारित हैं। मामले में जांच के निष्कर्ष और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

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