Sawan 2026 : जयपुर। (प्रज्ञा पांडे) बारिश की रिमझिम फुहारों के साथ भगवान शिव का प्रिय महीना सावन भक्तों के जीवन में आस्था, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आता है। इस पूरे महीने देशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है और “हर-हर महादेव” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक, व्रत और मंत्र जाप करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है तथा भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
सावन के सोमवार का विशेष महत्व
हिंदू धर्म में सावन के प्रत्येक सोमवार का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक, बेलपत्र, दूध, धतूरा और भांग अर्पित कर श्रद्धापूर्वक पूजा करने से शिव कृपा प्राप्त होती है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु सोमवार का व्रत रखते हैं और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप तथा शिव चालीसा का पाठ करते हैं।
उत्तर भारत में सावन की तिथियां
उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार और पंजाब सहित उत्तर भारत के राज्यों में सावन 30 जुलाई 2026 से 28 अगस्त 2026 तक रहेगा।
- पहला सोमवार – 3 अगस्त 2026
- दूसरा सोमवार – 10 अगस्त 2026
- तीसरा सोमवार – 17 अगस्त 2026 (इसी दिन नाग पंचमी)
- चौथा और अंतिम सोमवार – 24 अगस्त 2026
दक्षिण और पश्चिम भारत में सावन
महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में सावन 13 अगस्त 2026 से 10 सितंबर 2026 तक रहेगा।
- पहला सोमवार – 17 अगस्त 2026
- दूसरा सोमवार – 24 अगस्त 2026
- तीसरा सोमवार – 31 अगस्त 2026
- चौथा और अंतिम सोमवार – 7 सितंबर 2026
हरियाली तीज का शुभ संयोग
इस वर्ष हरियाली तीज 15 अगस्त 2026 (शनिवार) को मनाई जाएगी। तृतीया तिथि 14 अगस्त की शाम 6:46 बजे शुरू होगी और 15 अगस्त की शाम 5:28 बजे समाप्त होगी। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। महिलाएं हरे वस्त्र, हरी चूड़ियां और लहरिया पहनकर इस पर्व को उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाती हैं।
ऐसे करें भगवान शिव की पूजा
सावन में सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करें। इसके बाद शिव चालीसा का पाठ करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें। मान्यता है कि भगवान शिव सच्ची श्रद्धा और सरल भक्ति से शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
महादेव को क्यों प्रिय है सावन?
धार्मिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। विष के प्रभाव को शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया। तभी से सावन में जलाभिषेक की परंपरा प्रचलित हुई। यह कथा त्याग, करुणा और लोककल्याण का संदेश भी देती है।
आस्था और विश्वास का पवित्र महीना
सावन केवल एक धार्मिक महीना नहीं, बल्कि शिव भक्ति, आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। मंदिरों की घंटियां, कांवड़ यात्राएं, शिव भजन और “हर-हर महादेव” के जयघोष पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सावन में की गई सच्ची भक्ति जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है।



