नई दिल्ली। भारी हंगामे और लगातार बने गतिरोध के बीच संसद के मानसून सत्र का गुरुवार को औपचारिक रूप से समापन हो गया। सत्र के अंतिम दिन लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। विपक्ष के हंगामे के चलते लोकसभा में सामान्य कामकाज नहीं हो सका, जबकि राज्यसभा में महत्वपूर्ण विधेयक पारित होने के बाद राजनीतिक मुद्दे पर जोरदार बहस और हंगामा देखने को मिला।
लोकसभा में सुबह ही कार्यवाही स्थगित
मानसून सत्र का गुरुवार को आखिरी दिन था। लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। सदन में लगातार नारेबाजी और शोर-शराबे के कारण कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी। हालात को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने करीब 11:05 बजे सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी।
आमतौर पर लोकसभा की कार्यवाही दिनभर चलती है, लेकिन सत्र के अंतिम दिन हंगामे के कारण सदन सुबह ही स्थगित हो गया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी सदन में मौजूद थे।
राज्यसभा में विधेयक पारित, फिर हंगामा
राज्यसभा में भी अंतिम दिन राजनीतिक गर्माहट देखने को मिली। सदन ने ‘खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ को पारित किया। इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के प्रमुख नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी में उनके कार्यक्रम के बाद कथित शुद्धिकरण अनुष्ठान कराए जाने का मुद्दा उठाया।
इस मुद्दे को लेकर सदन में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। हंगामा बढ़ने के बाद राज्यसभा की कार्यवाही भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
हंगामे के बीच खत्म हुआ सत्र
दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के साथ ही संसद का मानसून सत्र औपचारिक रूप से समाप्त हो गया। सत्र के दौरान सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश और पारित किए गए, वहीं विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की।
हालांकि, अंतिम दिन भारी हंगामे और गतिरोध के कारण संसद की कार्यवाही सामान्य तरीके से आगे नहीं बढ़ सकी। इसके साथ ही मानसून सत्र का समापन राजनीतिक टकराव और हंगामे के बीच हुआ।



