Thursday, August 13, 2026
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राजस्थान UCC बिल पर बड़ी अपडेट: विधिक परीक्षण पूरा, मंत्री जोगाराम पटेल के पास पहुंचा ड्राफ्ट

राजस्थान में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। विधि विभाग ने UCC बिल के ड्राफ्ट का विधिक परीक्षण पूरा कर लिया है और इसे मंजूरी के लिए विधि मंत्री जोगाराम पटेल के पास भेज दिया गया है। मंत्री की मंजूरी के बाद ड्राफ्ट को कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। करीब 200 पेज के इस प्रस्तावित विधेयक को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों, अन्य राज्यों के प्रावधानों और आम जनता से मिले सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है।

जयपुर। राजस्थान में समान नागरिक संहिता विधेयक का ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंचती नजर आ रही है। विधि विभाग ने ड्राफ्ट का विधिक परीक्षण पूरा करने के बाद इसे मंजूरी के लिए विधि मंत्री जोगाराम पटेल के पास भेज दिया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने UCC विधेयक का ड्राफ्ट मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंपा था। इसके बाद गृह विभाग ने ड्राफ्ट को विधिक परीक्षण के लिए विधि विभाग के पास भेजा था।

करीब 200 पेज का होगा UCC विधेयक

सूत्रों के अनुसार राजस्थान का UCC विधेयक करीब 200 पेज का हो सकता है। समिति ने इसे तैयार करने के दौरान उन राज्यों के कानून और विधेयकों का अध्ययन किया है, जहां UCC को लेकर काम आगे बढ़ चुका है। ड्राफ्ट तैयार करते समय सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के साथ-साथ आम जनता से प्राप्त सुझावों को भी ध्यान में रखा गया है।

कैबिनेट में रखा जा सकता है महत्वपूर्ण प्रस्ताव

विधि मंत्री की मंजूरी मिलने के बाद UCC विधेयक को कैबिनेट के समक्ष भेजे जाने की संभावना है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में यह विधेयक महत्वपूर्ण एजेंडा बन सकता है। बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा सहित मंत्रिपरिषद के सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।

उत्तराखंड और गुजरात के प्रावधानों का अध्ययन

राजस्थान में UCC का ड्राफ्ट तैयार करने वाली समिति ने उत्तराखंड और गुजरात के प्रावधानों का भी अध्ययन किया है। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू हो चुकी है, जबकि गुजरात में UCC से संबंधित विधेयक विधानसभा से पारित हो चुका है, हालांकि अभी इसे कानून का अंतिम रूप नहीं मिला है। समिति ने इन राज्यों के कानूनी प्रावधानों के साथ सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का भी अध्ययन किया है।

आदिवासियों को दायरे से बाहर रखने की जानकारी

सूत्रों के मुताबिक संवैधानिक प्रावधानों के कारण आदिवासी समुदायों को प्रस्तावित UCC के दायरे से बाहर रखा गया है। हालांकि अंतिम प्रावधान विधेयक के आधिकारिक रूप से सामने आने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

UCC क्या है?

UCC यानी Uniform Civil Code (समान नागरिक संहिता) का उद्देश्य नागरिकों के व्यक्तिगत और पारिवारिक मामलों से जुड़े कानूनों में समान नियम लागू करना है। इसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति जैसे विषय शामिल हो सकते हैं। UCC का उद्देश्य धर्म के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर समान कानूनी प्रावधान लागू करना है। इसमें महिला और पुरुष के अधिकारों में समानता, विवाह के पंजीकरण और अन्य नागरिक प्रक्रियाओं से जुड़े नियम शामिल किए जा सकते हैं। हालांकि UCC का अर्थ धार्मिक रीति-रिवाजों को समाप्त करना नहीं है। इसका मुख्य फोकस व्यक्तिगत नागरिक कानूनों के उन हिस्सों पर होता है, जो नागरिक अधिकारों और पारिवारिक मामलों से जुड़े हैं।

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