जयपुर। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) को जल्द नया अध्यक्ष मिल सकता है। पूर्व अध्यक्ष यूआर साहू का कार्यकाल 19 जून को समाप्त होने के बाद आयोग का शीर्ष पद खाली हो गया है। ऐसे में राज्य सरकार नए अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर तेजी से मंथन कर रही है। सूत्रों के अनुसार इस महत्वपूर्ण पद के लिए चार वरिष्ठ अधिकारियों के नामों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इनमें दो वर्तमान में कार्यरत और दो सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक किसी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
फिलहाल आयोग के वरिष्ठ सदस्य लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह राठौड़ को कार्यवाहक अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि आयोग की प्रशासनिक और भर्ती संबंधी गतिविधियां प्रभावित न हों। लेकिन सरकार स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति जल्द करना चाहती है।
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अध्यक्ष पद की दौड़ में कौन-कौन?
सूत्रों के मुताबिक सरकार दो विकल्पों पर विचार कर रही है। पहला, किसी वर्तमान कार्यरत वरिष्ठ आईएएस या आईपीएस अधिकारी को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) दिलाकर आयोग की जिम्मेदारी सौंपी जाए। दूसरा, किसी अनुभवी सेवानिवृत्त अधिकारी को यह जिम्मेदारी दी जाए।
चर्चाओं में जिन नामों की सबसे अधिक चर्चा है उनमें सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शुभ्रा सिंह और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी हेमंत प्रियदर्शी प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। वहीं वर्तमान अधिकारियों में राजस्थान के डीजीपी राजीव शर्मा और वन एवं पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार के नाम भी चर्चा में बताए जा रहे हैं। हालांकि अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सहमति और राज्यपाल की नियुक्ति प्रक्रिया के बाद ही होगा।
सरकार जल्द फैसला क्यों लेना चाहती है?
सरकार की प्राथमिकता जल्द अध्यक्ष नियुक्त करने की बड़ी वजह आगामी भर्ती परीक्षाएं हैं। आने वाले समय में आरएएस भर्ती-2026 सहित कई महत्वपूर्ण भर्तियों की प्रक्रिया शुरू होनी है। इसके अलावा विभिन्न विभागों में लंबित और प्रस्तावित भर्ती प्रक्रियाओं को भी समयबद्ध तरीके से पूरा करना है।
ऐसे में सरकार ऐसे अधिकारी की तलाश में है, जिसके पास लंबा प्रशासनिक अनुभव हो और जो भर्ती प्रक्रिया की जटिलताओं को समझते हुए आयोग की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बना सके।
नए अध्यक्ष के सामने होंगी बड़ी चुनौतियां
पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक, भर्ती विवाद और चयन प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में नए अध्यक्ष के सामने आयोग की विश्वसनीयता को और मजबूत करना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
सरकार ऐसे चेहरे की तलाश में है जिसकी प्रशासनिक छवि बेदाग हो, जिसका रिकॉर्ड साफ-सुथरा हो और जिसे सुशासन तथा भर्ती प्रबंधन का व्यापक अनुभव हो। माना जा रहा है कि नए अध्यक्ष की नियुक्ति से सरकार युवाओं के बीच सकारात्मक संदेश देना चाहती है।
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जयपुर से दिल्ली तक लॉबिंग तेज
सूत्रों का कहना है कि अध्यक्ष पद को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर लॉबिंग भी तेज हो गई है। कई नामों को लेकर चर्चाएं चल रही हैं, लेकिन अंतिम फैसला मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंजूरी के बाद ही होगा। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह नियुक्ति बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसका सीधा असर राज्य की भर्ती व्यवस्थाओं और लाखों अभ्यर्थियों पर पड़ता है।
राजस्थान की सबसे बड़ी भर्ती एजेंसी है RPSC
राजस्थान लोक सेवा आयोग राज्य की सबसे बड़ी भर्ती एजेंसी है। आयोग के माध्यम से आरएएस, राजस्थान प्रशासनिक सेवा, शिक्षा विभाग, तकनीकी सेवाओं और विभिन्न सरकारी विभागों की भर्ती परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं।
लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य आयोग की निष्पक्ष और समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया पर निर्भर करता है। यही वजह है कि नए अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की नजरें सरकार के फैसले पर टिकी हुई हैं।
क्या कहते हैं संवैधानिक प्रावधान?
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है। अध्यक्ष का कार्यकाल छह वर्ष या 62 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, तक रहता है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा किस नाम पर अंतिम मुहर लगाते हैं और राजस्थान लोक सेवा आयोग का अगला अध्यक्ष कौन बनता है।



