Thursday, June 25, 2026
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देश में भैंस-बकरी की तरह बिक रहे सांसद-विधायक, खत्म हो रहा लोकतंत्र: अशोक गहलोत

जोधपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए प्रशासनिक व्यवस्था, जनकल्याणकारी योजनाओं और कानून-व्यवस्था सहित कई मुद्दों को लेकर सवाल खड़े किए। जोधपुर दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने राज्य सरकार की कार्यशैली की आलोचना करते हुए कहा कि आम जनता की समस्याओं के समाधान की दिशा में अपेक्षित प्रयास दिखाई नहीं दे रहे हैं।

गहलोत ने कहा कि प्रदेश में विभिन्न वर्गों से जुड़े लोगों के बीच असंतोष बढ़ रहा है। उनका आरोप है कि कई ऐसी योजनाएं, जिनका लाभ सीधे आम लोगों को मिलता था, अब प्रभावी तरीके से संचालित नहीं हो रही हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार को जनता की शिकायतों और जरूरतों पर अधिक गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक तंत्र को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जनता और अधिकारियों के बीच संवाद मजबूत होना चाहिए, ताकि लोगों की समस्याओं का समय पर समाधान हो सके।

गहलोत का कहना था कि सरकार को नियमित रूप से जनसुनवाई और संवाद कार्यक्रमों का आयोजन करना चाहिए, जिससे जमीनी स्तर की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। उन्होंने राज्य में विकास कार्यों की गति पर भी सवाल उठाए और कहा कि कई परियोजनाएं अपेक्षित रफ्तार से आगे नहीं बढ़ रही हैं। गहलोत ने आरोप लगाया कि सरकार का ध्यान जनहित से जुड़े मुद्दों की बजाय राजनीतिक गतिविधियों पर अधिक केंद्रित दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं, किसानों और आम नागरिकों की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

इस दौरान गहलोत ने विपक्ष की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में रचनात्मक आलोचना सरकार को बेहतर काम करने के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने भरोसा जताया कि जनता से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया जाता रहेगा। वहीं भाजपा नेताओं ने गहलोत के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि राज्य सरकार विकास और सुशासन के एजेंडे पर काम कर रही है। उनका दावा है कि प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से विकास कार्य किए जा रहे हैं और जनता को योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।

राजनीतिक हलकों में गहलोत के इन बयानों को लेकर चर्चा तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और बढ़ने के संकेत हैं।

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