नई दिल्ली (प्रज्ञा पांडे)। संयुक्त राज्य अमेरिका के फ्लोरिडा के एक युवा इंजीनियरिंग शिक्षक नाथन थॉमस ने विश्व के सबसे कम उम्र के पुरुष प्रोफेसर बनकर रिकॉर्ड बनाया है। नाथन की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। उन्होंने बेहद कम उम्र में कॉलेज की पढ़ाई शुरू कर दी थी। सिर्फ 10 साल की उम्र में उन्होंने कॉलेज में प्रवेश लिया और इसके बाद फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी की। कम उम्र में पढ़ाई पूरी करने के बाद अब वह खुद छात्रों को पढ़ाने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। नाथन को मियामी डेड कॉलेज में इंजीनियरिंग इंस्ट्रक्टर के तौर पर नियुक्त किया गया है। यहां वह छात्रों को प्रोग्रामिंग और तकनीकी विषयों की जानकारी देते हैं। उनकी क्लास की सबसे खास बात यह है कि कई बार उनके सामने बैठने वाले छात्र उम्र में उनके काफी करीब होते हैं। हालांकि, नाथन के लिए उम्र कभी भी सीखने और सिखाने के बीच बाधा नहीं बनी। नाथन का मानना है कि किसी भी विषय को सीखने के लिए उम्र मायने नहीं रखती। उनके अनुसार, क्लास में आने वाले हर छात्र का उद्देश्य एक ही होता है नई चीजें सीखना, खुद को बेहतर बनाना और आगे बढ़ना। उनके लिए सबसे खास पल वह होता है, जब कोई छात्र किसी मुश्किल विषय को समझने में सफल हो जाता है।
नाथन ऐसे परिवार से आते हैं, जहां इंजीनियरिंग और तकनीक से जुड़ा माहौल रहा है। बचपन से ही उनकी रुचि गणित और विज्ञान में रही। वह अपनी मां को भी अपनी सफलता का श्रेय देते हैं, जिन्होंने कम उम्र से ही उन्हें गणित और विज्ञान को समझने में मदद की। इतनी कम उम्र में प्रोफेसर बनने के बाद भी नाथन की पढ़ाई जारी है। वह University of Miami School of Law में कानून की पढ़ाई कर रहे हैं। भविष्य में उनका लक्ष्य इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी लॉ यानी बौद्धिक संपदा कानून के क्षेत्र में काम करना है। वह विज्ञान और तकनीक से जुड़े नए आविष्कारों को कानूनी सुरक्षा देने की दिशा में योगदान देना चाहते हैं। नाथन थॉमस की उपलब्धि यह दिखाती है कि अगर जुनून, मेहनत और सीखने की इच्छा हो तो उम्र सफलता की राह में रुकावट नहीं बनती। 18 साल की उम्र में प्रोफेसर बनकर उन्होंने दुनिया के सामने एक नई मिसाल पेश की है।



