जयपुर। राजस्थान के जल संकट से जूझ रहे इलाकों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। केंद्र सरकार की मौजूदगी में राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल को लेकर बनी सहमति के बाद अब राज्य के शेखावाटी क्षेत्र तक पानी पहुंचाने की नई रूपरेखा तैयार की जा रही है। इस योजना की सबसे खास बात यह है कि पानी की आपूर्ति पारंपरिक नहर प्रणाली के बजाय आधुनिक भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से की जाएगी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस व्यवस्था का उद्देश्य जल संरक्षण को अधिक प्रभावी बनाना है। खुली नहरों में पानी के वाष्पीकरण और रिसाव से होने वाले नुकसान को देखते हुए पाइपलाइन आधारित मॉडल को प्राथमिकता दी गई है। इससे पानी की बर्बादी में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना जताई जा रही है।
परियोजना का सीधा लाभ शेखावाटी क्षेत्र के प्रमुख जिलों—सीकर, चूरू और झुंझुनूं—को मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से पेयजल और सिंचाई जल की कमी झेल रहे इन क्षेत्रों में इस योजना को राहत देने वाली पहल माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भूमिगत पाइपलाइन बिछाने से बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता भी कम होगी। इससे किसानों और स्थानीय निवासियों को कम परेशानी का सामना करना पड़ेगा और परियोजना के क्रियान्वयन में तेजी आ सकती है। योजना को यमुना बेसिन की अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं से भी जोड़ा जा रहा है। इनमें रेणुकाजी, लखवार और किशाऊ जैसी परियोजनाएं शामिल हैं, जिनके माध्यम से अतिरिक्त जल उपलब्धता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
सरकार का दावा है कि भविष्य में यह नेटवर्क केवल पेयजल ही नहीं, बल्कि कृषि और औद्योगिक जरूरतों को भी पूरा करने में मदद करेगा। मानसून के दौरान उपलब्ध अतिरिक्त जल के उपयोग की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है।
फिलहाल परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट संबंधित एजेंसियों के पास विचाराधीन है। तकनीकी और वित्तीय स्वीकृतियां मिलने के बाद इसके निर्माण कार्य को गति मिलने की उम्मीद है। यदि योजना समय पर पूरी होती है तो राजस्थान के जल प्रबंधन तंत्र में यह एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है और राज्य के सूखाग्रस्त क्षेत्रों को दीर्घकालिक राहत मिल सकती है।



