अयोध्या |राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत लगातार गरमा रही है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को सोमवार देर रात अयोध्या के एक होटल में पुलिस ने नजरबंद कर लिया। बाद में उन्हें नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस ले जाया गया। अजय राय राम मंदिर ट्रस्ट कार्यालय के घेराव का ऐलान कर चुके थे और इसी सिलसिले में कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल अयोध्या पहुंचा था।अजय राय की पत्नी रीना राय ने एक वीडियो जारी कर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनके पति की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है और यदि उन्हें किसी प्रकार की क्षति पहुंचती है, तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। वहीं प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए अयोध्या में कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की गतिविधियों पर रोक लगाई।
इसी बीच, राम मंदिर में पिछले 17 वर्षों से तैनात रेडियो ऑपरेशन अधिकारी (RMO) अर्जुन देव का तबादला गोरखपुर कर दिया गया है। अर्जुन देव मंदिर परिसर के CCTV सिस्टम और काउंटिंग रूम की निगरानी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। सूत्रों के अनुसार, SIT जांच में उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में शामिल है।उधर, राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से पुलिस पहले ही करीब तीन घंटे पूछताछ कर चुकी है। जांच एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि चढ़ावा चोरी की जानकारी उन्हें कब और कैसे मिली तथा उसके बाद क्या कार्रवाई की गई। सरकार ने SIT से जल्द फाइनल रिपोर्ट सौंपने को कहा है।इस मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत 14 दिनों के लिए बढ़ा दी गई है। इससे पहले 7 जून को चोरी का मामला सामने आया था, 13 जून को SIT का गठन किया गया और 25 जून को FIR दर्ज होने के बाद आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसी दिन ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।
अयोध्या दौरे को लेकर कांग्रेस के अन्य नेताओं पर भी प्रशासन ने कार्रवाई की। पूर्व प्रदेश प्रवक्ता गौरव तिवारी को उनके आवास पर ही नजरबंद किया गया, जबकि पूर्व राज्यसभा सांसद एपी गौतम को बाराबंकी स्थित उनके घर से बाहर निकलने से रोक दिया गया। कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया, जबकि प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने को प्राथमिकता बताया है।अब इस पूरे मामले में सबकी नजर SIT की अंतिम रिपोर्ट और आगामी ट्रस्ट से जुड़ी बैठकों पर टिकी हुई है। जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि चढ़ावा चोरी मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।



