जयपुर: राजस्थान में ‘वंदे मातरम्’ के बयान से शुरू हुई राजनीतिक खींचतान अब देश की आजादी के इतिहास और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या के गंभीर आरोपों तक पहुंच चुकी है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग इस कदर बढ़ गई है कि दोनों ओर से इतिहास के पन्नों को टटोलते हुए तीखे वार किए जा रहे हैं।
पूरे विवाद की पटकथा तब लिखी गई जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के राजस्थान दौरे के दौरान दिए गए ‘वंदे मातरम्’ संबंधी बयान के बाद कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर बापू की हत्या का सीधा आरोप मढ़ दिया। रंधावा के इस तीखे प्रहार के बाद राजस्थान सरकार के नगरीय विकास एवं आवासन (UDH) मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने मोर्चा संभाला और ऐसा पलटवार किया, जिसने प्रदेश के राजनीतिक तापमान को नए चरम पर पहुंचा दिया है।
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काला पानी की सजा और आजादी का संघर्ष: मंत्री खर्रा के तीखे सवाल
स्वायत्त शासन विभाग में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से खास बातचीत करते हुए मंत्री झाबर सिंह खर्रा से जब सुखजिंदर सिंह रंधावा के बयानों पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने न सिर्फ कांग्रेस के दावों को खारिज किया, बल्कि उस दौर के शीर्ष नेतृत्व की भूमिका पर सवाल उठा दिए।
मंत्री खर्रा ने कहा कि अगर सरदार वल्लभभाई पटेल को छोड़ दिया जाए, तो उस दौर में कांग्रेस के नरम दल का कोई भी प्रमुख नेता अंडमान-निकोबार की सेलुलर जेल (काला पानी) की सजा काटकर नहीं आया था। उन्होंने याद दिलाया कि भारत की आजादी की लड़ाई में 13 से 25 साल तक के अनगिनत युवा और क्रांतिकारी हंसते-हंसते फांसी के फंदों पर झूल गए थे और गोलियां खाई थीं।
‘अगर हत्या न होती तो बनता 20 KM चौड़ा कॉरिडोर’
बातचीत के दौरान जब पत्रकार ने मंत्री झाबर सिंह खर्रा से सवाल किया कि क्या वे महात्मा गांधी की हत्या को सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं, तो खर्रा ने एक बेहद चर्चित और चौंकाने वाला दावा पेश किया।
मंत्री खर्रा ने कहा, “उस समय कांग्रेस के नरम दल के जो सबसे बड़े नेता थे, जिनकी गोली मारकर हत्या की गई… अगर वह हत्या नहीं होती, तो पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान के बीच 20 किलोमीटर चौड़े कॉरिडोर के बनने की दिशा में भी एक आमरण अनशन होने वाला था।”
इसके अलावा UDH मंत्री ने आजादी के समय नोआखली और कलकत्ता में हुए भीषण सांप्रदायिक दंगों का संदर्भ दिया और स्वामी श्रद्धानंद की हत्या के बाद तत्कालीन नेतृत्व के रुख को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए।
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रंधावा का पलटवार और गर्म होती सियासत
एक तरफ कांग्रेस पार्टी संघ और बीजेपी पर बापू के हत्यारों की विचारधारा से जुड़े होने का आरोप लगा रही है, वहीं मंत्री खर्रा के पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान को जोड़ने वाले 20 किमी चौड़े कॉरिडोर वाले दावे ने राजस्थान से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह जुबानी जंग और उग्र रूप ले सकती है, क्योंकि आगामी स्थानीय चुनावों से ठीक पहले दोनों ही प्रमुख दल इतिहास और विचारधारा की आड़ में राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं।



