Sunday, September 27, 2026
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फसल बीमा योजना में राजस्थान की बड़ी उपलब्धि: देश में मिला चौथा स्थान, किसानों को प्रीमियम से 4.5 गुना ज्यादा मिला क्लेम

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में राजस्थान ने देश में चौथा स्थान हासिल किया। किसानों को प्रीमियम के मुकाबले 4.5 गुना क्लेम मिला। जानिए डिजिटल फसल कटाई और टेक-संचालित व्यवस्था में कैसे मिला राज्य को बड़ा फायदा।

जयपुर। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के क्रियान्वयन में राजस्थान ने देश भर में अपनी मजबूत धाक जमाई है। केंद्र सरकार की ओर से जारी योजना-विशिष्ट प्रदर्शन मूल्यांकन में राजस्थान 43.5 अंकों के साथ राष्ट्रीय स्तर पर चौथे स्थान पर रहा है। राज्य को यह सफलता मुख्य रूप से तकनीक के बेहतर इस्तेमाल, डिजिटल फसल कटाई प्रयोगों और पारदर्शिता के चलते मिली है। केंद्र सरकार ने राज्यों का यह आकलन 10 प्रमुख पैमानों—जैसे कि बीमा कवरेज, राज्यांश सब्सिडी का भुगतान, फसल कटाई प्रयोग, क्लेम भुगतान की समयबद्धता, केसीसी खातों का नामांकन और शिकायतों के निस्तारण—के आधार पर किया है। इस रैंकिंग में असम 55.5 अंकों के साथ शीर्ष पर रहा, जबकि उत्तर प्रदेश 47.5 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा।

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7,800 करोड़ रुपये के प्रीमियम पर 35,600 करोड़ रुपये का क्लेम

राजस्थान में योजना की शुरुआत (खरीफ 2016) से लेकर खरीफ 2026 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस दौरान कुल 25.47 करोड़ फसल बीमा पॉलिसियां बनाई गईं। इस अवधि में राज्य के किसानों ने लगभग 7,800 करोड़ रुपये का प्रीमियम जमा किया, जिसके बदले उन्हें 35,600 करोड़ रुपये से अधिक के बीमा क्लेम का भुगतान किया गया। यानी किसानों को उनके द्वारा दी गई प्रीमियम राशि का करीब साढ़े चार गुना (4.5 गुना) लाभ मिला। इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार दोनों ने लगभग 19-19 हजार करोड़ रुपये का अंशदान प्रीमियम के रूप में दिया।

तकनीक और डिजिटल रिकॉर्ड में शानदार प्रदर्शन

राजस्थान की इस उपलब्धि के पीछे सबसे बड़ा योगदान डिजिटल तकनीक का रहा है:

  • 90% ऑनलाइन फसल कटाई प्रयोग: राज्य में करीब 90 प्रतिशत फसल कटाई प्रयोग अब ऐप के जरिए ऑनलाइन किए जा रहे हैं। इससे पैदावार के सही आंकड़े दर्ज करने और पारदर्शिता लाने में बड़ी मदद मिली है।
  • पूर्ण अंक: ‘येसटेक’ व्यवस्था और ऐप आधारित फसल कटाई प्रयोग—दोनों तकनीकी मानकों में राजस्थान ने 10 में से 10 पूरे अंक हासिल किए।
  • डिजिटल लैंड रिकॉर्ड्स: राज्य के 52,946 गांवों में से 47,028 गांवों (लगभग 89%) के भू-अभिलेखों को फसल बीमा पोर्टल से जोड़ दिया गया है, जिससे कागजी प्रक्रिया में होने वाली देरी और फर्जीवाड़े पर लगाम लगी है।

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फर्जीवाड़े पर सख्त रुख, 10 से अधिक FIR दर्ज

कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल के अनुसार, योजना में किसी भी तरह की गड़बड़ी या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फर्जीवाड़े के सामने आए मामलों में अब तक 10 से ज्यादा एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी हैं। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि शत-प्रतिशत फसल कटाई प्रयोग ऐप के माध्यम से ही दर्ज किए जाएं। अब सरकार का मुख्य ध्यान बीमा कवरेज का दायरा बढ़ाने, दावों का समय पर निपटारा करने और किसानों तक क्लेम की राशि जल्द से जल्द व बिना किसी रुकावट के पहुंचाने पर है।

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