जयपुर। राजस्थान में आगामी पंचायतीराज संस्थाओं के आम चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी तैयारियां पूरी तरह से तेज कर दी हैं। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर चुनाव की तारीखों का ऐलान होना बाकी है, लेकिन उससे पहले आयोग ने चुनावी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी व सुगम बनाने के लिए एक विस्तृत और सख्त नई गाइडलाइन जारी कर दी है।
इस नई गाइडलाइन के तहत आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव भले ही अलग-अलग चरणों में संपन्न कराए जाएं, लेकिन नामांकन से लेकर मतगणना तक की व्यवस्थाओं को लेकर कई बड़े बदलाव किए गए हैं, जो चुनाव मैदान में उतरने वाले हर दावेदार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
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नामांकन प्रक्रिया की तस्वीर हुई साफ
आयोग की नई व्यवस्था के अनुसार, उम्मीदवारों की सुविधा और पारदर्शिता के लिए आवेदन के स्तर तय कर दिए गए हैं। जिला परिषद सदस्यों के लिए नामांकन सीधे जिला मुख्यालय पर स्वीकार किए जाएंगे, जबकि पंचायत समिति सदस्यों के आवेदन संबंधित पंचायत समिति स्तर पर लिए जाएंगे। इसके अलावा सरपंच और पंच पदों की प्रक्रिया भी स्थानीय निर्वाचन नियमों के तहत पूरी की जाएगी, जिससे उम्मीदवारों को यह स्पष्ट रहेगा कि उन्हें अपना पर्चा कहाँ दाखिल करना है।
ईवीएम का होगा रैंडमाइजेशन, 5% मशीनें रहेंगी ट्रेनिंग के लिए
चुनावों में गड़बड़िए की आशंका को खत्म करने के लिए आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के आवंटन में ‘ई-सूची सॉफ्टवेयर’ के जरिए रैंडमाइजेशन पद्धति अपनाने का फैसला किया है। जिले में उपलब्ध कुल ईवीएम में से केवल 5 प्रतिशत मशीनों को ही चुनाव कर्मियों के प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) के लिए अलग रखा जाएगा। खास बात यह है कि एक चरण में बची हुई रिजर्व ईवीएम का उपयोग अगले चरणों (जैसे तीसरे और चौथे चरण) में व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा।
30 प्रतिशत रिजर्व ईवीएम और चार अंकों का विशेष कोड
सुरक्षा के मोर्चे पर आयोग ने इस बार बेहद कड़े कदम उठाए हैं। कुल मशीनों का 30 प्रतिशत हिस्सा रिजर्व में रखा जाएगा। इन रिजर्व ईवीएम पर चार अंकों का एक विशेष कोडिंग सिस्टम होगा, जिसमें पहले दो अंक जिला परिषद क्षेत्र की पहचान बताएंगे और अगले दो अंक संबंधित पंचायत समिति क्षेत्र को दर्शाएंगे। इसके साथ ही उस पर बूथ नंबर भी दर्ज होगा, जिससे जरूरत पड़ने पर मशीन की सटीक लोकेशन का तुरंत पता चल सके।
इसके अलावा, रिजर्व ईवीएम का ‘एंड बटन’ पूरी तरह से लॉक रहेगा। यह मशीनें सामान्य तरीके से चालू नहीं हो सकेंगी और केवल सेक्टर या जोनल मजिस्ट्रेट की विशेष अनुमति व चाबी के जरिए ही एक्टिव की जा सकेंगी।
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ग्रामीण इलाकों में बढ़ी सियासी हलचल
भले ही अभी चुनाव की तारीखों की घोषणा का इंतजार है, लेकिन आयोग के इन सख्त प्रशासनिक और तकनीकी बदलावों ने यह साफ कर दिया है कि इस बार चुनाव पूरी तरह से कड़ी निगरानी में होंगे। दूसरी ओर, गांवों की चौपालों से लेकर पंचायत मुख्यालयों तक संभावित उम्मीदवारों ने अपनी राजनीतिक बिसात बिछानी शुरू कर दी है और हर किसी की नजर अब चुनाव आयोग के अगले बड़े ऐलान पर टिकी हुई है।



