जयपुर। राजस्थान के श्रीगंगानगर और पदमपुर इलाके में प्रस्तावित कचरा प्रबंधन प्लांट को लेकर पिछले काफी समय से सुलग रहा विरोध आखिरकार एक बड़े समझौते पर जाकर थमता नजर आ रहा है। ग्रामीणों के आंदोलन के बीच देर रात RLP सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल और प्रशासनिक अमले के बीच हुई मैराथन वार्ता आखिरकार सफल हो गई। प्रशासन ने नरसिंहपुरा बीरानी में प्रस्तावित कचरा प्लांट के लिए अब किसी दूसरी वैकल्पिक जगह की तलाश करने का स्पष्ट आश्वासन दिया है।
महापंचायत के बाद प्रशासन को मिला था अल्टीमेटम
इससे पहले नरसिंहपुरा बीरानी में एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया था, जहाँ हनुमान बेनीवाल ने प्रशासन को दो टूक अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि इस कचरा प्लांट के मुद्दे का कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो ग्रामीण और पार्टी कार्यकर्ता हाईवे की तरफ कूच करेंगे और रात में ही श्रीगंगानगर पहुंचकर कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे। बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में कई बड़े अधिकारी मौके पर पहुँच गए। एडीएम सुभाष चंद्र, एएसपी दीपक शर्मा, डीएसपी पुष्पेंद्र सिंह, एसडीएम राजेंद्र कुमार और तहसीलदार सूर्या स्वामी सहित तमाम अधिकारी स्थिति संभालने के लिए मौके पर मौजूद रहे।
टोल प्लाजा पर करना पड़ा धरना प्रदर्शन
शुरुआती दौर की बातचीत जब बेनतीजा रही, तो आंदोलनकारियों ने तय कार्यक्रम के अनुसार श्रीगंगानगर की ओर कूच करने की तैयारी शुरू कर दी। इसके बाद हनुमान बेनीवाल का काफिला नेशनल हाईवे-62 स्थित गणेशगढ़ टोल प्लाजा पर जा पहुँचा, जहाँ भारी पुलिस जाब्ता पहले से तैनात था। पुलिस द्वारा रोके जाने पर बेनीवाल समर्थकों के साथ टोल प्लाजा पर ही धरने पर बैठ गए। इस प्रदर्शन के चलते नेशनल हाईवे पर करीब एक घंटे तक यातायात पूरी तरह से बाधित रहा और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
क्यों है कचरा प्लांट को लेकर इतना विरोध?
पूरा विवाद नरसिंहपुरा बीरानी में कचरे के नए प्लांट के प्रस्ताव को लेकर खड़ा हुआ था। ग्रामीणों का विरोध इस बात पर था कि प्रस्तावित स्थल के बेहद नजदीक ही ‘गोविंद गौधाम गौशाला’ संचालित होती है, जिसमें इस समय 2,000 से अधिक गोवंश पल रहे हैं। ग्रामीणों और गौसेवकों का साफ कहना था कि इस प्लांट के आने से गौशाला और वहाँ रहने वाले बेजुबान गोवंश के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा। इसके अलावा आसपास की घनी आबादी की सेहत पर मंडराने वाले खतरों को लेकर भी ग्रामीण लगातार आवाज उठा रहे थे।
साढ़े छह हफ्ते का समय और पांच सदस्यीय कमेटी का गठन
गणेशगढ़ टोल प्लाजा पर करीब एक घंटे चले हाई-वोल्टेज ड्रामे और अधिकारियों की लंबी समझाइश के बाद आखिरकार स्थिति शांत हुई। प्रशासन ने वैकल्पिक स्थान तलाशने के लिए डेढ़ महीने (लगभग 45 दिन) का समय मांगा है। इस पूरे मामले का स्थायी समाधान निकालने के लिए एक पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया जाएगा, जो मिलकर उचित जगह का चयन करेगी। जयपुर स्तर पर भी इस संबंध में पहले ही चर्चा हो चुकी थी, जिसके बाद अब जाकर सहमति बन पाई है। इस प्रशासनिक आश्वासन के बाद फिलहाल आंदोलन को स्थगित कर दिया गया है।



