जयपुर। राजस्थान के बारां जिले में स्थित ऐतिहासिक शाहबाद कंजर्वेशन रिजर्व (शाहबाद जंगल) एक बार फिर बड़े पर्यावरणीय संकट के मुहाने पर खड़ा नजर आ रहा है। यहाँ प्रस्तावित 1800 मेगावाट के वाटर पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट (PSP) को लेकर स्थानीय आदिवासियों, किसानों और पर्यावरण प्रेमियों का गुस्सा फूट पड़ा है। इस परियोजना के खिलाफ अब जन संगठनों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
पीपल्स ग्रीन पार्टी (PGP), शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन, चंबल संसद और शाहबाद संरक्षण समिति ने एक संयुक्त मोर्चा बनाते हुए ऐलान किया है कि यदि सरकार ने अपना फैसला नहीं बदला, तो आगामी 20 नवंबर को हजारों की संख्या में किसान, युवा और सहरिया आदिवासी जयपुर पहुंचकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे और सरकार से सीधा संवाद करेंगे।
1.19 लाख पेड़ों की कटाई का दावा
जयपुर स्थित पीपल्स ग्रीन पार्टी के कार्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पार्टी अध्यक्ष डॉ. सुधांशु और शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन के प्रमुख गब्बर यादव ने इस प्रोजेक्ट पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि तथाकथित विकास के नाम पर शाहबाद के समृद्ध पर्यावरण और जैव विविधता की बलि दी जा रही है।
संगठनों ने चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि इस परियोजना के रास्ते में 1 लाख 19 हजार 759 पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है। अगर पूरे इकोसिस्टम की बात करें तो इससे अनगिनत अन्य पेड़-पौधे, दुर्लभ जड़ी-बूटियाँ और क्षेत्र की प्राकृतिक कार्बन अवशोषण क्षमता पर भी बहुत बुरा असर पड़ेगा।
500 गांवों की आजीविका और कुनो नदी पर खतरा
चंबल संसद के अध्यक्ष बृजेश विजय और जल क्रांतिकारी रोबिन सिंह ने चेतावनी दी है कि इस प्रोजेक्ट के कारण शाहबाद और उसके आसपास के करीब 500 गांवों की खेती, पानी और जीवनयापन पर संकट आ जाएगा। उन्होंने कुनो नदी के पानी को लिफ्ट कर रीसायकल करने की योजना का भी पुरजोर विरोध किया। उनका कहना है कि इससे नदी का प्राकृतिक बहाव रुक जाएगा और भूजल स्तर नीचे चला जाएगा, जिससे जंगल पर पूरी तरह निर्भर रहने वाले सहरिया आदिवासी समुदाय की मुश्किलें कई गुना बढ़ जाएंगी।
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वन्यजीवों और चीता कॉरिडोर पर मंडराया साया
पर्यावरणविदों का कहना है कि शाहबाद का यह घना जंगल पैंथर, भालू, जरख, भेड़िए और गिद्ध जैसे कई महत्वपूर्ण वन्यजीवों का प्राकृतिक आशियाना है। यह क्षेत्र मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध ‘कुनो नेशनल पार्क’ और राजस्थान के ‘गांधी सागर’ के बीच वन्यजीवों के आने-जाने (वाइल्डलाइफ कॉरिडोर) के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। यहाँ बांध और बिजलीघर जैसी भारी-भरकम संरचनाएं बनने से वन्यजीवों की आवाजाही बाधित होगी और इस पूरे क्षेत्र की नायाब जैव विविधता तबाह हो जाएगी।
सरकार से पुनर्विचार की मांग
संगठनों ने साफ कर दिया है कि उनका यह आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से चलाया जाएगा। लेकिन यदि सरकार ने इस प्रोजेक्ट से जुड़ी सैद्धांतिक मंजूरियों को वापस नहीं लिया, तो 20 नवंबर को शाहबाद का जनसैलाब जयपुर की सड़कों पर उतरकर अपनी बात मजबूती से रखेगा।



