जयपुर। राजस्थान पंचायत चुनाव के पहले चरण का मतदान पूरा होते ही भाजपा और कांग्रेस ने अगले चरणों की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित कर दिया है। दोनों ही दलों में उम्मीदवारों के चयन, स्थानीय नेताओं के बीच तालमेल और चुनावी समीकरणों को लेकर बैठकों का दौर तेज हो गया है। तीसरे चरण के नामांकन की अंतिम तारीख 23 अक्टूबर तय होने के कारण पार्टियों के सामने उम्मीदवारों के नाम समय पर तय करने की चुनौती है। राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, नामांकन के बाद 26 अक्टूबर को नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होगी और इसके बाद चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे।
कम मतदान से भाजपा की रणनीति पर फिर विचार
पहले चरण के मतदान के बाद भाजपा अपने चुनावी आकलन में जुट गई है। पार्टी के शुरुआती अनुमान जिन सीटों पर जीत को लेकर मजबूत माने जा रहे थे, वहां मतदान के रुझानों और स्थानीय फीडबैक के आधार पर नए सिरे से समीकरण देखे जा रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में अपेक्षा के मुताबिक मतदान नहीं होने की चर्चा के बीच पार्टी नेतृत्व संभावित नतीजों को लेकर सतर्क है। ऐसे में उम्मीदवारों और स्थानीय नेताओं से संपर्क कर स्थिति की समीक्षा की जा रही है। नतीजों के बाद संभावित राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए प्रत्याशियों के साथ समन्वय बनाए रखने की तैयारियां भी की जा रही हैं।
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भाजपा ने फोन पर दी उम्मीदवारों को नामांकन की सूचना
तीसरे चरण की जिला परिषद और पंचायत समिति सीटों के लिए भाजपा ने उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की कवायद तेज कर दी है। पार्टी की ओर से आधिकारिक सूची जारी करने के बजाय वरिष्ठ नेताओं के माध्यम से कई प्रत्याशियों को फोन पर नामांकन दाखिल करने की सूचना दिए जाने की बात सामने आई है।
नामांकन प्रक्रिया में पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के दस्तावेज और चुनाव चिह्न से जुड़े औपचारिक काम संबंधित जिला प्रभारियों के जरिए पूरा कराने की तैयारी बताई जा रही है। हालांकि, उम्मीदवारों की पूरी अधिकृत सूची सार्वजनिक होने के बाद ही सभी सीटों पर पार्टी के चयन की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
कांग्रेस में टिकटों को लेकर आखिरी समय तक मशक्कत
दूसरी ओर, कांग्रेस ने भी तीसरे चरण के प्रत्याशियों के चयन और पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों से जुड़े दस्तावेज जारी करने की प्रक्रिया तेज की। नामांकन की अंतिम तारीख नजदीक होने के कारण पार्टी नेताओं को कई सीटों पर सहमति बनाने के लिए अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ी।
पार्टी के प्रदेश वॉर रूम के साथ अलग-अलग जिलों में राजनीतिक मामलों की समितियों की बैठकें हुईं। इन बैठकों में उम्मीदवारों के चयन, स्थानीय समीकरणों और चुनावी तैयारियों पर चर्चा की गई। टिकट वितरण को लेकर कुछ क्षेत्रों में स्थानीय नेताओं के बीच मतभेद और गुटबाजी की स्थिति भी सामने आने की जानकारी है।
भरतपुर और डीग सहित कुछ जिलों में प्रदेश सह-प्रभारी चिरंजीवी राव ने बैठकों और उम्मीदवार चयन से जुड़ी प्रक्रिया की कमान संभाली। पार्टी की कोशिश रही कि नामांकन की समयसीमा से पहले उम्मीदवारों के नामों पर सहमति बनाकर अधिकृत प्रत्याशियों को जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए जा सकें।
डोटासरा ने संभाला मोर्चा, विवाद सुलझाने की कोशिश
जिन सीटों पर टिकट को लेकर ज्यादा खींचतान रही, वहां कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने स्थानीय नेताओं से बातचीत कर दावेदारों के बीच सहमति बनाने और जिलों से मिले फीडबैक के आधार पर निर्णय लेने की कोशिश की। सहमति बनने के बाद जिला परिषद और पंचायत समिति सीटों के लिए पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों को सिंबल से जुड़े दस्तावेज भेजे जाने की जानकारी है। तीसरे चरण की प्रक्रिया के बीच अब पार्टी का ध्यान उन क्षेत्रों पर भी है, जहां टिकट वितरण के बाद नाराजगी या बगावत की आशंका बनी हुई है।
कांग्रेस के सामने चौथे चरण के लिए भी उम्मीदवारों का चयन बाकी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जैसलमेर जिले की सीटों पर प्रत्याशियों को लेकर अभी और मंथन किया जाना है।
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अगले चरणों में स्थानीय समीकरण होंगे अहम
पहले चरण के मतदान के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के लिए अब स्थानीय स्तर पर संगठन को एकजुट रखना और उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल बनाना अहम हो गया है। टिकटों को लेकर नाराज नेताओं को मनाना, निर्दलीय उम्मीदवारों से होने वाले संभावित नुकसान का आकलन करना और जिला स्तर पर चुनावी प्रबंधन मजबूत करना दोनों दलों की प्राथमिकताओं में शामिल है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि अगले चरणों में दोनों पार्टियां किन उम्मीदवारों पर भरोसा जताती हैं और टिकट वितरण के बाद स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली चुनौतियों से कैसे निपटती हैं।



