Petrol Pump Fuel Limit: पीएम मोदी के पेट्रोल-डीजल के इस्तेमाल को संयमित करने की अपील के बाद अब तेल कंपनियों ने बिक्री पर सीलिंग लागू करना शुरू कर दी है. राजस्थान के पेट्रोल पंप डीलरों ने आरोप लगाया है कि तेल विपणन कंपनियों ने खुदरा दुकानों पर ईंधन की आपूर्ति घटा दी है और उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर अनौपचारिक सीमा लगा दी है. कंपनियों ने बिना किसी औपचारिक आदेश के डीलरों को मोबाइल संदेशों और मौखिक निर्देश देकर पंपो पर अधिकतम 50 लीटर पेट्रोल और 200 लीटर डीजल देने की लिमिट तय कर दी है. राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के संरक्षक सुनीत बगई ने गुरुवार को तेल कंपनियों के समन्वयक एवं कार्यकारी निदेशक मनोज गुप्ता को लिखकर फैसले पर नाराजगी जताई और इसे मनमाना बताया.
हालांकि कार्यकारी निदेशक मनोज गुप्ता ने साफ कहा है कि पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर कोई सामान्य लिमिट नहीं लगाई गई है. हालांकि, सप्लाई और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नियमों में कुछ बदलाव किए गए हैं.
एसोसिएशन के महासचिव शशांक कोरानी के अनुसार, ‘इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ ने कथित तौर पर डीलरों को प्रति उपभोक्ता डीजल बिक्री 50,000 रुपये और पेट्रोल बिक्री 5,000 रुपये तक सीमित करने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि ‘भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ ने कथित तौर पर पेट्रोल बिक्री 49 लीटर और डीजल बिक्री 200 लीटर तक सीमित की है तथा हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा भी इसी तरह के प्रतिबंध बताए गए हैं.
कानून-व्यवस्था बिगड़ने की चेतावनी
डीलर्स संगठन ने चेतावनी दी है कि इस तरह की अनौपचारिक पाबंदियों से पेट्रोल पंपों पर विवाद और अव्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती है. उनका कहना है कि उपभोक्ताओं को जब अचानक सीमित मात्रा में ईंधन मिलेगा तो इससे तनाव बढ़ सकता है. संगठन ने यह भी कहा कि अब तक केंद्र सरकार, राज्य सरकार या तेल कंपनियों की ओर से कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है, जिससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है.
पेट्रोल पंप खाली होने का खतरा
एसोसिएशन ने कहा कि आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत पेट्रोल पंपों को न्यूनतम स्टॉक बनाए रखना जरूरी होता है, लेकिन डिपो से कम सप्लाई मिलने के कारण कई पंपों पर ईंधन का स्टॉक तेजी से घट रहा है. डीलर्स ने आशंका जताई कि यदि सप्लाई की यही स्थिति रही तो कई पेट्रोल पंप खाली हो सकते हैं और डीलरों पर नियमानुसार कार्रवाई का खतरा भी बढ़ जाएगा.
सार्वजनिक जानकारी जारी करने की मांग
डीलर्स संगठन ने तेल कंपनियों से मांग की है कि यदि बिक्री सीमा लागू की गई है तो इसके स्पष्ट लिखित दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। साथ ही अखबारों और सार्वजनिक माध्यमों के जरिए उपभोक्ताओं को जानकारी दी जाए ताकि भ्रम और विवाद की स्थिति से बचा जा सके.



