जयपुर: राजस्थान के शहरी निकायों में चुनावी हलचल अब अपने चरम पर पहुंच चुकी है। राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) द्वारा स्थानीय निकाय चुनावों के कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि प्रदेश के विभिन्न शहरों में किसी भी क्षण आदर्श आचार संहिता लागू की जा सकती है।
स्वायत्त शासन विभाग (DLG) ने नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पालिकायों में सीटों के आरक्षण तथा वार्ड परिसीमन की विस्तृत रिपोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग को सौंप दी है। निर्वाचन आयोग के आला अधिकारी इस रिपोर्ट का बारीकी से तकनीकी और कानूनी परीक्षण कर रहे हैं। यदि रिपोर्ट में कोई प्रक्रियात्मक खामी नहीं मिलती है, तो आयोग आज दोपहर बाद या शाम तक अधिसूचना जारी कर चुनावी तारीखों का ऐलान कर सकता है।
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दो चरणों में हो सकते हैं चुनाव
सूत्रों के मुताबिक, राज्य निर्वाचन आयोग ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए प्रशासनिक तथा सुरक्षा संबंधी तैयारियां पूरी कर ली हैं। निकाय चुनाव की प्रक्रिया को दो चरणों में विभाजित कर संपन्न कराने की योजना है:
- पहला चरण: सितंबर 2026 के पहले सप्ताह में मतदान कराया जा सकता है।
- दूसरा चरण: सितंबर के दूसरे सप्ताह में शेष निकायों के लिए वोट डाले जाएंगे।
वर्तमान में आयोग की टीमें अंतिम मतदाता सूची (Voter List) और पोलिंग बूथों की सुरक्षा व्यवस्था का अंतिम मिलान कर रही हैं, ताकि घोषणा के बाद चुनावी प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।
आचार संहिता लागू होते ही क्या बदलेगा?
चुनावी कार्यक्रम के ऐलान के साथ ही संबंधित नगरीय निकायों की सीमा में मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (MCC) प्रभावी हो जाएगा। इससे निकायों के सामान्य कामकाज और प्रशासनिक फैसलों पर सीधा असर पड़ेगा:
1. इन गतिविधियों पर रहेगा पूर्ण प्रतिबंध:
- संबंधित निकायों में किसी भी नए विकास कार्य का शिलान्यास, लोकार्पण या उद्घाटन नहीं हो सकेगा।
- नए वर्क ऑर्डर (Work Orders), टेंडर जारी करने या नई योजनाओं की घोषणा पर पाबंदी रहेगी।
- जनप्रतिनिधि या मंत्री चुनावी फायदे के लिए नई घोषणाएं नहीं कर सकेंगे।
2. ये कार्य बिना रुकावट चलते रहेंगे:
- जिन निर्माण या विकास परियोजनाओं के कार्य आदेश आचार संहिता लागू होने से पहले जारी हो चुके हैं, वे यथावत जारी रहेंगे।
- धरातल पर चल रहे चालू निर्माण कार्यों पर कोई रोक नहीं होगी।
- सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, और पेयजल आपूर्ति जैसी मूलभूत नागरिक सेवाएं नियमित रूप से संचालित होती रहेंगी।
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विधानसभा सत्र और विधायी कार्य
राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर भी चर्चाएं हैं कि विधानसभा में पेश होने वाले विधेयकों का चुनाव पर क्या प्रभाव पड़ेगा। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, आचार संहिता के दौरान भी राज्य सरकार विधानसभा में तकनीकी बिल पेश कर सकती है। हालांकि, इस दौरान सरकार ऐसा कोई भी फैसला, विज्ञापन या घोषणा नहीं कर सकती जिससे मतदाताओं के निर्णय को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया जा सके।
अंतिम चुनावी तारीखों, चरणों और संबंधित निकायों की स्पष्ट सूची राज्य निर्वाचन आयोग की अधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ही सामने आ सकेगी।



