नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने पीएम केयर्स फंड में मौजूद बड़ी राशि को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि फंड में उपलब्ध करीब 8,450 करोड़ रुपये का इस्तेमाल देश के सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने में किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक विद्यालय आज भी भवन, पेयजल, शौचालय, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं।
दिपके ने सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत ग्रामीण इलाकों के विद्यालयों का दौरा कर वहां की समस्याओं को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका जोर स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए बेहतर और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने पर है।
दिपके का कहना है कि पीएम केयर्स फंड में जमा 8,450 करोड़ रुपये जैसी बड़ी राशि यदि सरकारी स्कूलों के विकास में लगाई जाए तो इससे बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को लाभ मिल सकता है। उन्होंने स्कूलों में आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने और शिक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देने की मांग की है।
ग्रामीण स्कूलों की स्थिति को लेकर अभियान
अभिजीत दिपके के नेतृत्व में चल रहे अभियान के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी विद्यालयों में कई तरह की कमियां सामने आने का दावा किया गया है। अभियान में स्कूल भवनों की स्थिति, कक्षाओं की सुविधाएं, शौचालय, पेयजल, बिजली और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध अन्य संसाधनों का जायजा लिया जा रहा है।
दिपके ने सरकारी विद्यालयों में बच्चों से सफाई कराए जाने के मुद्दे पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जहां सफाई कर्मचारियों की व्यवस्था है, वहां विद्यार्थियों से यह काम नहीं कराया जाना चाहिए। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की जरूरत बताई।
उन्होंने मंत्रियों, अधिकारियों और सरकारी शिक्षकों से अपने बच्चों को सरकारी विद्यालयों में पढ़ाने की अपील भी की है। उनके अनुसार, सरकारी व्यवस्था से जुड़े लोगों का सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली पर भरोसा बढ़ेगा तो स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए जवाबदेही भी मजबूत होगी।
पीएम केयर्स फंड की 8,450 करोड़ रुपये की राशि को लेकर दिपके की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब उनका अभियान सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार को प्रमुख मुद्दा बनाकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने सरकार से शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की मांग की है।



