जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती-2021 की पुनर्परीक्षा (Re-Exam) को लेकर याचिकाकर्ताओं को बड़ी अंतरिम राहत दी है। गुरुवार को जस्टिस गणेशराम मीणा की अदालत ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) को निर्देश दिए कि सभी याचिकाकर्ताओं को आवेदन पत्र (Form) एडिट करने का अवसर दिया जाए और उन्हें प्रोविजनल रूप से पुनर्परीक्षा में शामिल किया जाए।
कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि “प्रशासनिक असुविधा किसी पात्र अभ्यर्थी को अवसर से वंचित करने का वैध आधार नहीं हो सकती।”कोर्ट ने माना कि केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को पुनर्परीक्षा में शामिल करना, जिन्होंने मूल परीक्षा में दोनों पेपर दिए थे, प्रथम दृष्टया उचित नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
RPSC ने SI भर्ती-2021 को रद्द करने के बाद 8 मई 2026 को पुनर्परीक्षा कराने की घोषणा की थी। आयोग ने उसी दिन जारी प्रेस नोट में केवल उन अभ्यर्थियों को आवेदन एडिट करने का मौका दिया था, जिन्होंने वर्ष 2021 की मूल परीक्षा में दोनों प्रश्नपत्र दिए थे।
इसके खिलाफ कई अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनका कहना था कि उन्होंने भर्ती के लिए आवेदन तो किया था, लेकिन व्यक्तिगत और अपरिहार्य कारणों से परीक्षा में शामिल नहीं हो सके। ऐसे में उन्हें पुनर्परीक्षा से बाहर करना अनुचित है।
RPSC ने क्या दलील दी?
आयोग की ओर से कोर्ट में कहा गया कि मूल भर्ती में करीब 4 लाख ऐसे अभ्यर्थी थे जिन्होंने आवेदन तो किया था, लेकिन परीक्षा नहीं दी। इनमें से कई अब सरकारी नौकरी में हैं या परीक्षा की तैयारी छोड़ चुके हैं। ऐसे सभी अभ्यर्थियों को दोबारा मौका देने से आवेदन प्रक्रिया की जांच और सत्यापन में बड़ी प्रशासनिक कठिनाई होगी।
हाईकोर्ट ने क्यों दी राहत?
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी भर्ती रद्द करते समय साल 2021 की पूरी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सभी अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करने की बात कही थी।
कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि ‘भर्ती प्रक्रिया में शामिल’ शब्द की संकीर्ण व्याख्या करना उचित नहीं है। इसलिए याचिकाकर्ताओं को भी सितंबर में होने वाली पुनर्परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाना चाहिए।
भर्ती से जुड़े अहम आंकड़े
- SI भर्ती-2021 में करीब 7.95 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था।
- इनमें से 3.83 लाख अभ्यर्थी ही लिखित परीक्षा में शामिल हुए थे।
- अब तक RPSC केवल इन्हीं अभ्यर्थियों को री-एग्जाम में शामिल करने की तैयारी कर रहा था।
अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद RPSC को याचिकाकर्ताओं को फॉर्म एडिट करने का मौका देना होगा और उन्हें प्रोविजनल रूप से री-एग्जाम में शामिल करना होगा। मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट अंतिम निर्णय ले सकता है।



