नई दिल्ली। राजस्थान के नागौर से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सांसद हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा में नियम 377 के तहत राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों से जुड़े एक संवेदनशील मुद्दे को उठाया। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का ध्यान बाड़मेर सहित अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में मुस्लिम समाज के धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाए जाने और कथित तौर पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की ओर आकर्षित किया।
बेनीवाल ने कहा कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है, लेकिन सुरक्षा से जुड़े मामलों में भी कानून और संविधान के प्रावधानों का पालन होना जरूरी है। उन्होंने सभी धर्मों के धार्मिक स्थलों के सम्मान और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया।
बेनीवाल ने केंद्रीय जांच टीम भेजने की मांग की
लोकसभा में अपने वक्तव्य के दौरान बेनीवाल ने केंद्र सरकार से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने बाड़मेर के सीमावर्ती इलाकों में हुई कथित कार्रवाई की निष्पक्ष जांच के लिए एक केंद्रीय टीम भेजने की मांग रखी। बेनीवाल के मुताबिक, सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी भी धार्मिक स्थल के खिलाफ कार्रवाई पारदर्शी तरीके से और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना उचित प्रक्रिया के कार्रवाई होने से स्थानीय लोगों की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं और सामाजिक सौहार्द पर भी असर पड़ सकता है।
संविधान और कानूनी प्रक्रिया का दिया हवाला
RLP सांसद ने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने और धार्मिक स्थलों के सम्मान का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी धार्मिक स्थल से जुड़ा कोई कानूनी विवाद या सुरक्षा संबंधी मामला है, तो उसका समाधान कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि बाड़मेर के सीमावर्ती इलाकों में हुई कथित कार्रवाई के बाद स्थानीय मुस्लिम समुदाय में नाराजगी और असुरक्षा की भावना पैदा हुई है।
लोकसभा में इन धार्मिक स्थलों का किया उल्लेख
बेनीवाल ने अपने वक्तव्य में बाड़मेर जिले के कुछ धार्मिक स्थलों और स्थानों का उल्लेख किया, जहां उनके अनुसार हाल में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हुई है। इनमें शामिल हैं:
- जामा मस्जिद, सियाई
- मेकन का पार
- केरकोरी
- रामपुरा, दहेवा
- दरगाह सैयद गुल मोहम्मद शाह
- भलगांव, बाखासर और आसपास की अन्य मस्जिदें
बेनीवाल ने कहा कि इन स्थानों से जुड़ी कार्रवाई को लेकर सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में चिंता और आक्रोश है।
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करने की मांग
सांसद हनुमान बेनीवाल ने केंद्र सरकार से मांग की कि सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी भी धार्मिक स्थल या आवासीय भवन के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करते समय सुप्रीम कोर्ट के लागू दिशा-निर्देशों और कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी कार्रवाई से पहले स्थानीय नागरिकों और धर्मगुरुओं से संवाद स्थापित किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी समुदाय के साथ भेदभाव की स्थिति पैदा न हो।
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प्रभावित धार्मिक स्थलों की जांच की मांग
बेनीवाल ने केंद्र सरकार से उन धार्मिक स्थलों पर उच्चस्तरीय जांच टीम भेजने की मांग की, जहां कथित तौर पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हुई है। उन्होंने कहा कि जांच टीम स्थानीय प्रभावित लोगों से बातचीत करे और पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाए। उन्होंने सरकार से आवश्यक कदम उठाने की मांग करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण भी जरूरी है।



