Monday, September 21, 2026
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धौलपुर में 27 पार्षदों के बावजूद कांग्रेस के हाथ से गई सभापति की कुर्सी, सत्यदेव कंसाना के आरोपों से गरमाई सियासत

राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव के बाद धौलपुर नगर परिषद में सभापति पद को लेकर सियासी घटनाक्रम ने सबका ध्यान खींचा है। नगर परिषद में कांग्रेस 27 वार्डों में जीत के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन इसके बावजूद सभापति की कुर्सी कांग्रेस के हाथ नहीं आ सकी।

धौलपुर। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव के बाद धौलपुर नगर परिषद में सभापति पद को लेकर सियासी घटनाक्रम ने सबका ध्यान खींचा है। नगर परिषद में कांग्रेस 27 वार्डों में जीत के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन इसके बावजूद सभापति की कुर्सी कांग्रेस के हाथ नहीं आ सकी। आखिरकार निर्दलीय प्रत्याशी गिरीश गर्ग निर्विरोध सभापति चुन लिए गए। धौलपुर नगर परिषद में कुल 60 वार्ड हैं। चुनाव परिणाम में कांग्रेस को 27, भाजपा को 11, निर्दलीय प्रत्याशियों को 19 और बसपा को 3 सीटें मिलीं। सभापति पद के लिए 31 पार्षदों का समर्थन जरूरी था। ऐसे में कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से सिर्फ चार सीट दूर थी।

सत्यदेव कंसाना ने दाखिल किया था नामांकन
इसी सियासी गणित के बीच कांग्रेस पार्षद सत्यदेव कंसाना ने सभापति पद के लिए निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल किया था। हालांकि, नाम वापसी के अंतिम दिन उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया। 18 सितंबर को सत्यदेव कंसाना समेत कुल छह उम्मीदवारों—सीमा शर्मा, निशांत सिंह, कमलजीत, शराफत खान और सुभाष शर्मा—ने अपने नामांकन वापस ले लिए। इसके बाद मैदान में केवल गिरीश गर्ग रह गए और उन्हें निर्विरोध सभापति घोषित कर दिया गया।

नामांकन वापस लेने के बाद लगाए गंभीर आरोप
नामांकन वापस लेने के बाद सत्यदेव कंसाना ने कांग्रेस संगठन और पार्टी के पार्षदों को लेकर गंभीर आरोप लगाए। एक वीडियो में कंसाना ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने ही पार्षदों को बेच दिया। यह सत्यदेव कंसाना का आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

कंसाना ने यह भी दावा किया कि उन्हें सभापति चुनाव के लिए कांग्रेस का पार्टी सिंबल नहीं मिला था। कंसाना ने कहा कि उन्होंने 16 सितंबर को बिना कांग्रेस सिंबल के नामांकन दाखिल किया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी के कुछ पार्षदों के उनके साथ नहीं रहने के कारण उनके पास नामांकन वापस लेने के अलावा विकल्प नहीं बचा था।

कांग्रेस की रणनीति पर भी उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद कांग्रेस की रणनीति को लेकर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मामले में रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा कि पार्टी का सिंबल पहले ही दिया जा चुका था और इस मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की बात कही।

दूसरी ओर, गिरीश गर्ग ने सभी प्रतिद्वंद्वियों के नामांकन वापस लेने के बाद निर्विरोध सभापति पद हासिल कर लिया। खास बात यह है कि गर्ग ने इस बार वार्ड पार्षद का चुनाव नहीं लड़ा था। राजस्थान में लागू मौजूदा निकाय चुनाव व्यवस्था के तहत सभापति पद के लिए सीधे नामांकन की व्यवस्था होने के कारण वह इस पद के लिए मैदान में उतरे और निर्विरोध निर्वाचित हुए।

गर्ग के पक्ष में भाजपा के 11, बसपा के 3 और 19 निर्दलीयों में से 17 पार्षदों का समर्थन बताया गया, जिससे कुल समर्थन 31 तक पहुंच गया। हालांकि कांग्रेस के 27 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद वह सभापति पद हासिल नहीं कर सकी।

धौलपुर का यह घटनाक्रम अब कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक रणनीति और पार्षदों के बीच समन्वय को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं, सत्यदेव कंसाना के आरोपों और पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया के बाद आने वाले दिनों में इस मामले में और राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

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