Monday, May 18, 2026
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Bomb Threat in Rajasthan: मजाक या साजिश? राजस्थान विधानसभा को तीसरी बार उड़ाने की धमकी, चप्पे-चप्पे की ली गई तलाशी

जयपुर। राजस्थान की सबसे सुरक्षित इमारत और लोकतंत्र की पंचायत ‘विधानसभा भवन’ इन दिनों दहशतगर्दों के रडार पर है। सोमवार को एक बार फिर विधानसभा के आधिकारिक ईमेल पर आए एक संदेश ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया। धमकी देने वाले ने दावा किया कि दोपहर ठीक 12 बजे विधानसभा परिसर ‘सिलिकॉन और RDX’ के धमाकों से दहल उठेगा। हैरानी की बात यह है कि बीते एक महीने के भीतर यह तीसरी बार है जब विधानसभा को बम से उड़ाने की चुनौती दी गई है।

दोपहर 12 बजे का अल्टीमेटम और पुलिस का सर्च ऑपरेशन

धमकी भरा ईमेल मिलते ही जयपुर पुलिस एक्शन मोड में आ गई। भारी पुलिस जाब्ता, बम निरोधक दस्ता (BDDS) और डॉग स्क्वायड ने तुरंत मोर्चा संभाला। एहतियात के तौर पर कर्मचारियों को इमारत में प्रवेश करने से रोक दिया गया और भीतर मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

धमकी के मुख्य बिंदु:

  • नियत समय: ईमेल में ठीक दोपहर 12 बजे धमाके की चेतावनी दी गई।
  • विस्फोटक: दहशत फैलाने के लिए ‘RDX’ और ‘सिलिकॉन’ जैसे घातक रसायनों का नाम लिया गया।
  • सुरक्षा घेरा: पूरे परिसर की चप्पे-चप्पे पर तलाशी ली गई, लेकिन घंटों की मशक्कत के बाद भी कुछ संदिग्ध नहीं मिला।

जयपुर बना ‘सॉफ्ट टारगेट’? धमकियों का सिलसिला जारी

गुलाबी नगरी में पिछले कुछ दिनों से ईमेल के जरिए दहशत फैलाने का एक खतरनाक पैटर्न सामने आया है। विधानसभा के अलावा इन संस्थानों को भी निशाना बनाया जा चुका है:

  1. राजस्थान हाई कोर्ट: न्याय के मंदिर को भी धमकी भरा ईमेल मिला।
  2. SMS स्टेडियम: खेल के मैदान को भी उड़ाने का दावा किया गया।
  3. निजी स्कूल: शहर के प्रतिष्ठित स्कूलों को भी नहीं बख्शा गया।

हालांकि, अब तक की सभी धमकियां ‘फेक’ (Hoax) साबित हुई हैं, लेकिन इसने पुलिस प्रशासन की नाक में दम कर रखा है।

बड़ा सवाल: आखिर पकड़ से बाहर क्यों हैं ये ‘सिरफिरे’?

बार-बार मिल रही धमकियों ने राजस्थान पुलिस की साइबर सेल और तकनीकी विशेषज्ञों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण माने जा रहे हैं:

  • VPN और डार्क वेब: शुरुआती जांच के अनुसार, ये ईमेल विदेशी सर्वर या वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) का उपयोग करके भेजे जा रहे हैं, जिससे भेजने वाले का असली आईपी एड्रेस छिपा रहता है।
  • सुरक्षा की परीक्षा: जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं यह सुरक्षा तंत्र की मुस्तैदी और ‘रिस्पॉन्स टाइम’ को परखने की कोई गहरी साजिश तो नहीं?
  • संसाधनों की बर्बादी: हर फर्जी धमकी पर करोड़ों का सरकारी धन, समय और पुलिस बल की ऊर्जा बर्बाद हो रही है, जिसका सीधा असर शहर की वास्तविक कानून व्यवस्था पर पड़ता है।

साइबर एक्सपर्ट्स और केंद्रीय एजेंसियों की मदद

जयपुर पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि वे हर कॉल और ईमेल को पूरी गंभीरता से लेते हैं। अब ईमेल के हेडर और डिजिटल फुटप्रिंट्स को डिकोड करने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों की भी मदद ली जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही इन ‘डिजिटल दहशतगर्दों’ को सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा।


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