Rahul Gandhi Defamation Case: लोकसभा में विपक्ष के नेता और रायबरेली से सांसद राहुल गांधी से जुड़े मानहानि मामले में बुधवार को एमपी-एमएलए अदालत में अहम सुनवाई हुई. इस दौरान दोनों पक्षों के वकीलों के बीच दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 311 को लेकर विस्तृत बहस हुई. अदालत ने सभी दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है और अब 2 मई को आदेश सुनाया जाएगा.
धारा 311 के आवेदन पर अदालत में हुई बहस
राहुल गांधी की ओर से पेश अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ला ने बताया कि वादी पक्ष के वकील संतोष कुमार पांडेय द्वारा दाखिल धारा 311 के आवेदन पर अदालत में बहस हुई. यह धारा अदालत को किसी भी गवाह को बुलाने या साक्ष्य पेश कराने का अधिकार देती है, यदि उसे न्याय के लिए आवश्यक समझा जाए.
इससे पहले 28 मार्च की सुनवाई में वादी पक्ष ने राहुल गांधी की आवाज का नमूना लेने और उसकी फोरेंसिक जांच कराने की मांग की थी। इसके लिए धारा 311 और धारा 91 के तहत आवेदन प्रस्तुत किया गया था। वादी पक्ष का कहना है कि आवाज के नमूने का मिलान पहले से मौजूद सीडी से कराया जाए और इसकी जांच फॉरेंसिक लैब में हो।
हालांकि, राहुल गांधी के वकीलों ने इस मांग का विरोध करते हुए इसे अनुचित और आधारहीन बताया। उनका कहना है कि इस तरह की प्रक्रिया न्यायसंगत नहीं है।
अब तक मामले में क्या कुछ हुआ ?
यह मामला भाजपा नेता विजय मिश्रा द्वारा अक्टूबर 2018 में दर्ज कराया गया था. इस प्रकरण में राहुल गांधी ने 20 फरवरी 2024 को अदालत में आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद उन्हें 25-25 हजार रुपये के दो मुचलकों पर जमानत मिल गई थी.
इसके बाद 26 जुलाई 2024 को राहुल गांधी ने अदालत में उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराया और खुद को निर्दोष बताया. उन्होंने इस मामले को राजनीतिक साजिश करार दिया. इसके बाद अदालत ने वादी पक्ष को साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, जिसके तहत गवाह पेश किए गए. वहीं, 20 फरवरी को धारा 313 के तहत दर्ज बयान में अदालत ने उनसे आरोपों पर स्पष्टीकरण और साक्ष्य मांगे थे, लेकिन उनके अधिवक्ता की ओर से कोई अतिरिक्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया. अब इस मामले में सभी की नजर 2 मई पर टिकी है, जब अदालत अपना फैसला सुनाएगी.
ये भी पढ़ें: सीजफायर के बीच होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ा तनाव, ईरान ने कार्गो शिप को बनाया निशाना



