West Bengal Politics : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और मंत्री तपस रॉय के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने सियासी हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। अपने फेसबुक पोस्ट में उन्होंने दावा किया है कि राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जल्द ही बड़ी टूट देखने को मिल सकती है और हालात महाराष्ट्र जैसे राजनीतिक घटनाक्रम की ओर बढ़ सकते हैं।
तपस रॉय के मुताबिक, रितब्रत बनर्जी के संपर्क में टीएमसी के करीब 50 विधायक बताए जा रहे हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में टीएमसी के लोकप्रिय नारे ‘खेला होबे’ का भी उल्लेख करते हुए संकेत दिया कि आने वाले समय में राज्य की राजनीति में “असली खेल” देखने को मिल सकता है।
मुस्तफिजुर रहमान का बड़ा बयान सामने आया
पश्चिम बंगाल विधानसभा पहुंचे टीएमसी विधायक मुस्तफिजुर रहमान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह व्यक्तिगत काम से विधानसभा आए हैं। उन्होंने कहा, मुझे नहीं पता, मैं पर्सनल काम से आया हूं। बाहर आकर बताऊंगा।’ वहीं, रीताब्रता गुट लगातार अपनी ताकत बढ़ने का दावा कर रहा है, गुट का कहना है कि अब उनके समर्थन में 60 विधायक हैं। वहीं, रीताब्रता गुट लगातार अपनी ताकत बढ़ने का दावा कर रहा है. गुट का कहना है कि अब उनके समर्थन में 60 विधायक हैं।

तपस रॉय ने किया बड़ा राजनीतिक दावा
भाजपा विधायक तपस रॉय ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल की सियासत में हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने दावा किया है कि राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर असंतोष लगातार गहराता जा रहा है और पार्टी धीरे-धीरे विभाजन की ओर बढ़ रही है। मंगलवार को दिए गए बयान में तपस रॉय ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी में अंदरूनी खींचतान तेज होती जा रही है। उन्होंने आगे दावा किया कि यदि पार्टी में किसी प्रकार की टूट होती है, तो पश्चिम बंगाल में भी वर्ष 2022 में महाराष्ट्र में देखने को मिली राजनीतिक उथल-पुथल जैसी स्थिति बन सकती है।
विधानसभा परिसर में पत्रकारों से की अहम बातचीत
कोलकाता के मानिकतला विधानसभा क्षेत्र से हाल ही में निर्वाचित भाजपा विधायक तपस रॉय ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर आंतरिक मतभेद और असंतोष बढ़ने का दावा किया। तपस रॉय ने कहा कि टीएमसी के अंदरूनी विरोधाभास लगातार गहराते जा रहे हैं। उनके अनुसार, इसका एक प्रमुख कारण यह है कि पार्टी में ऐसे कई लोगों को स्थान दिया गया है जिनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि या अनुभव मजबूत नहीं रहा है।
टीएमसी धीरे-धीरे राजनीतिक परिदृश्य से गायब
भाजपा विधायक तपस रॉय ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को लेकर एक बार फिर तीखा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया है कि आने वाले समय में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) राज्य के राजनीतिक परिदृश्य से धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी। तपस रॉय ने कहा कि टीएमसी के भीतर कई स्तरों पर असंतोष बढ़ रहा है और पार्टी के नेताओं व विधायकों के बीच नाराजगी साफ देखी जा सकती है। उनके अनुसार, यह स्थिति पार्टी में संभावित विभाजन की ओर स्पष्ट संकेत करती है।
गौरतलब है कि तपस रॉय ने वर्ष 2024 में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया था। पार्टी बदलने के बाद से ही वह लगातार टीएमसी की कार्यशैली और संगठनात्मक ढांचे को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। भाजपा में शामिल होने के बाद तपस रॉय समय-समय पर टीएमसी नेतृत्व और उसकी नीतियों पर तीखी टिप्पणियां करते रहे हैं, जिससे पश्चिम बंगाल की राजनीतिक सरगर्मी अक्सर बढ़ जाती है।



