Saturday, October 31, 2026
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Online Food Order करना हो जाएगा महंगा, जानें Swiggy-Zomato ग्राहकों को कितने रुपए देने होंगे ज्यादा

Online Food Order: जोमैटो, स्विगी और मैजिकपिन द्वारा मंच शुल्क में की गई बढ़ोतरी से देशभर के लाखों लोगों के लिए ऑनलाइन खाना ऑर्डर करना महंगा हो जाएगा. 22 सितंबर से डिलिवरी शुल्क पर 18 प्रतिशत माल एवं सेवा कर (GST) लगने के कारण यह और भी बढ़ सकता है.

Online Food Order: त्योहारी सीजन से पहले जोमैटो, स्विगी और मैजिकपिन द्वारा मंच शुल्क में की गई बढ़ोतरी से देशभर के लाखों लोगों के लिए ऑनलाइन खाना ऑर्डर करना महंगा हो जाएगा. 22 सितंबर से डिलिवरी शुल्क पर 18 प्रतिशत माल एवं सेवा कर (GST) लगने के कारण यह और भी बढ़ सकता है.

स्विगी ने चुनिंदा बाजारों में अपना प्लेटफॉर्म या मंच शुल्क GST सहित 15 रुपये कर दिया है. प्रतिद्वंद्वी जोमैटो ने अपना शुल्क बढ़ाकर 12.50 रुपये (GST को छोड़कर) कर दिया है, जबकि तीसरी सबसे बड़ी खाने की डिलिवरी करने वाली कंपनी मैजिकपिन ने भी व्यापक उद्योग रुझानों के अनुरूप, अपना मंच शुल्क संशोधित करके 10 रुपये प्रति ऑर्डर कर दिया है.

ऑनलाइन खाना मंगाना इतना हो जाएगा महंगा

माना जा रहा है कि 22 सितंबर से डिलिवरी शुल्क पर लगाए जाने वाले 18 प्रतिशत GST के कारण जोमैटो उपयोगकर्ताओं के लिए प्रति ऑर्डर लगभग 2 रुपये और स्विगी ग्राहकों के लिए 2.6 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.

मैजिकपिन में GST वृद्धि का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा

मैजिकपिन के प्रवक्ता ने बताया कि कंपनी पहले से ही अपने भोजन वितरण लागत पर 18 प्रतिशत GST का भुगतान कर रही है. प्रवक्ता ने आगे कहा, ‘जीएसटी में हालिया बदलाव हमारी लागत संरचना को प्रभावित नहीं करती हैं. इसलिए, उपभोक्ताओं पर जीएसटी वृद्धि का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. हमारा मंच शुल्क 10 रुपये प्रति ऑर्डर ही रहेगा, जो प्रमुख खाद्य वितरण कंपनियों में सबसे कम है.’

बता दें कि हाल के दिनों में मंच शुल्क खाद्य वितरण कंपनियों के लिए राजस्व का एक अतिरिक्त स्रोत बनकर उभरा है. जोमैटो, स्विगी और मैजिकपिन द्वारा एक साथ की गई बढ़ोतरी भारत के खाद्य वितरण क्षेत्र में बढ़ती लागत के बढ़ते रुझान को रेखांकित करती है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या लाखों ग्राहकों के लिए सामर्थ्य और सुविधा अब भी साथ-साथ चल सकती है.]

ये भी पढ़ें: GST कटौती के बाद कीमतें कम नहीं हुईं, तो उद्योग संगठनों की शिकायतों पर विचार करेंगे: CBEC

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