जयपुर। ऑपरेशन सिंदूर के बाद राजस्थान का पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र एक बार फिर भारतीय सैन्य तैयारियों के लिहाज से चर्चा में है। पोकरण, जैसलमेर, जोधपुर और बीकानेर के आसपास के इलाके लंबे समय से सेना और वायुसेना के महत्वपूर्ण अभ्यास क्षेत्रों में शामिल रहे हैं। अब इन क्षेत्रों में युद्धाभ्यास के दौरान आधुनिक तकनीक, ड्रोन, एयर डिफेंस और काउंटर-ड्रोन सिस्टम पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। पश्चिमी राजस्थान का रेगिस्तानी इलाका अपनी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सैन्य अभ्यास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। बड़े खुले क्षेत्र और फील्ड फायरिंग रेंज सेना को वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में विभिन्न हथियार प्रणालियों और रणनीतियों को परखने का अवसर देते हैं।
जोधपुर में बहुराष्ट्रीय अभ्यास से बढ़ा रणनीतिक महत्व
जोधपुर एयरबेस पर होने वाले बहुराष्ट्रीय वायुसेना अभ्यासों ने राजस्थान के सामरिक महत्व को और बढ़ाया है। भारत के साथ अलग-अलग देशों की वायुसेनाएं इन अभ्यासों में हिस्सा लेती रही हैं, जिससे संयुक्त संचालन, युद्ध कौशल और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल का अनुभव साझा करने का अवसर मिलता है।
पश्चिमी राजस्थान में होने वाले इन अभ्यासों को केवल सैन्य प्रशिक्षण तक सीमित नहीं देखा जा रहा है। इनके जरिए भारत विभिन्न देशों के साथ रक्षा सहयोग और इंटरऑपरेबिलिटी को भी मजबूत कर रहा है।
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पोकरण और महाजन में आधुनिक युद्ध तकनीक की टेस्टिंग
राजस्थान की पोकरण और महाजन फील्ड फायरिंग रेंज लंबे समय से भारतीय सेना के प्रमुख अभ्यास क्षेत्रों में शामिल हैं। इन इलाकों में अलग-अलग हथियार प्रणालियों के परीक्षण और युद्धाभ्यास किए जाते हैं।
आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए ड्रोन और स्वार्म ड्रोन जैसी तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ी है। इसी के साथ काउंटर-यूएएस सिस्टम और एयर डिफेंस तकनीक पर भी ध्यान दिया जा रहा है। ऐसी प्रणालियों का उद्देश्य ड्रोन जैसे हवाई खतरों की पहचान, निगरानी और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता को मजबूत करना है।
दो मोर्चों की चुनौती के लिए तैयारी
भारत की सैन्य रणनीति में पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं से जुड़ी संभावित चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए संयुक्त सैन्य क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। राजस्थान का पश्चिमी इलाका इस तैयारी में खास भूमिका निभाता है।
फील्ड अभ्यासों के जरिए सेना और वायुसेना को अलग-अलग परिस्थितियों में तेजी से कार्रवाई, समन्वय और आधुनिक हथियार प्रणालियों के इस्तेमाल का अभ्यास मिलता है। इसका मकसद किसी भी संभावित चुनौती की स्थिति में सेनाओं की तैयारियों को मजबूत रखना है।
रक्षा क्षेत्र में बढ़ रहा भारत का सहयोग
भारत अब केवल रक्षा उपकरणों के बड़े खरीदार के तौर पर ही नहीं, बल्कि घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के तहत देश में ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, मिसाइल तकनीक और अन्य रक्षा उपकरणों के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है।
डिफेंस सेक्टर में स्टार्टअप, MSME और निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ने से स्वदेशी तकनीक को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। ड्रोन और अन्य आधुनिक सैन्य तकनीकों से जुड़े आयोजनों के जरिए भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमताएं प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है।
राजस्थान में भारत के प्रमुख सैन्य अभ्यास
पश्चिमी राजस्थान कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय और द्विपक्षीय सैन्य अभ्यासों का आयोजन स्थल रहा है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
तरंग शक्ति
भारतीय वायुसेना का बहुराष्ट्रीय अभ्यास तरंग शक्ति विभिन्न देशों की वायुसेनाओं को एक साथ अभ्यास का अवसर देता है। इसका पहला संस्करण 2024 में आयोजित हुआ था, जबकि इसके अगले चरणों में जोधपुर भी प्रमुख आयोजन स्थल रहा है।
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युद्ध अभ्यास
भारत और अमेरिका के बीच होने वाला युद्ध अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच संयुक्त प्रशिक्षण और संचालन क्षमता को मजबूत करने पर केंद्रित है। राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज इस तरह के अभ्यासों के लिए महत्वपूर्ण स्थान रही है।
वीर गार्जियन
भारत और जापान के बीच होने वाला वीर गार्जियन वायुसेना अभ्यास दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत करने का एक प्रमुख माध्यम है। जोधपुर भी इस अभ्यास की मेजबानी कर चुका है।
डेजर्ट नाइट
भारत, फ्रांस और संयुक्त अरब अमीरात के बीच होने वाला डेजर्ट नाइट बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास है। इसमें तीनों देशों की वायुसेनाएं संयुक्त रूप से विभिन्न परिचालन परिस्थितियों में अभ्यास करती हैं।
गरुड़ और शक्ति
भारत और फ्रांस के बीच गरुड़ वायुसेना अभ्यास तथा शक्ति थलसेना अभ्यास भी दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग का हिस्सा हैं। इन अभ्यासों के जरिए दोनों देशों की सेनाएं संयुक्त संचालन और सैन्य अनुभव साझा करती हैं।
राजस्थान का रेगिस्तान क्यों है अहम?
राजस्थान का पश्चिमी हिस्सा अपनी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण भारतीय सेना के लिए बेहद उपयोगी प्रशिक्षण क्षेत्र है। यहां विशाल खुले इलाके और फील्ड फायरिंग रेंज मौजूद हैं, जहां बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास किए जा सकते हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदले सुरक्षा माहौल के बीच आधुनिक तकनीक और संयुक्त सैन्य क्षमता पर बढ़ता जोर यह संकेत देता है कि भविष्य के युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण के तौर-तरीकों में भी बदलाव किया जा रहा है। ऐसे में राजस्थान का पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र भारत की सैन्य तैयारियों और रक्षा सहयोग में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।



