Wednesday, June 17, 2026
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OECD देशों के तेल भंडार 1990 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंचे, IEA ने जताई चिंता

फ्रांस: ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (OECD) के सदस्य देशों में तेल भंडार तीन दशक से अधिक समय के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) की ताजा मासिक रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की आपूर्ति में बाधाओं के कारण देशों को अपने रणनीतिक भंडार का व्यापक उपयोग करना पड़ा, जिससे स्टॉक में भारी गिरावट दर्ज की गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, संघर्ष शुरू होने के बाद से OECD देशों के कुल तेल भंडार में करीब 163 मिलियन बैरल की कमी आई है। एजेंसी का कहना है कि वैश्विक मांग में अपेक्षाकृत कमजोरी के बावजूद उपलब्ध सुरक्षा भंडार तेजी से घट रहे हैं, जो ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का विषय है।

IEA के अनुसार, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तेल परिवहन प्रभावित होने के बाद वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया था। इस स्थिति से निपटने और बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए एजेंसी ने सदस्य देशों के साथ मिलकर आपातकालीन तेल भंडार जारी करने की योजना लागू की। इस पहल के तहत बाजार में बड़ी मात्रा में तेल उपलब्ध कराया गया, जिससे आपूर्ति संकट को कुछ हद तक कम करने में मदद मिली।

एजेंसी ने बताया कि जून और जुलाई के दौरान आपातकालीन भंडार जारी करने की रफ्तार पहले की तुलना में कम रह सकती है। इसका एक कारण पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में हुए हालिया कूटनीतिक प्रयास भी हैं, जिनसे ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौटने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि IEA का मानना है कि ऊंची तेल कीमतों का असर वैश्विक मांग पर पड़ता रहेगा। एजेंसी ने अनुमान लगाया है कि तेल की खपत में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज हो सकती है, क्योंकि महंगी ऊर्जा लागत उद्योगों और उपभोक्ताओं दोनों पर दबाव बढ़ा रही है।

इसके बावजूद दीर्घकालिक तस्वीर को लेकर एजेंसी अपेक्षाकृत आशावादी नजर आई। IEA का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में व्यापार मार्गों के सामान्य होने, तेल कीमतों में नरमी और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में सुधार के चलते मांग में फिर से बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। ऊर्जा बाजार पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति यह दर्शाती है कि भू-राजनीतिक घटनाएं आज भी वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर गहरा प्रभाव डालने की क्षमता रखती हैं।

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