Saturday, August 22, 2026
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NHM घोटाले में नीरज के. पवन समेत 5 के खिलाफ चार्जशीट: 5 हजार पन्नों के दस्तावेज कोर्ट में पेश, एक आरोपी ने किया सरेंडर

जयपुर में साल 2016 के NHM घोटाले से जुड़े मामले में ACB ने IAS अधिकारी नीरज के. पवन समेत 5 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। करीब 5 हजार पन्नों के दस्तावेज कोर्ट में पेश किए गए हैं। मामला आरोग्य रथ योजना में कथित फर्जी बिल और 1 करोड़ रुपए से ज्यादा के भुगतान से जुड़ा है। ACB के मुताबिक, हजारों दिनों का फर्जी संचालन दिखाकर भुगतान उठाने का आरोप है। एक आरोपी सुनील राठौड़ ने कोर्ट में सरेंडर किया।

जयपुर। साल 2016 के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) में कथित घूसखोरी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने IAS अधिकारी नीरज के. पवन समेत 5 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश की है। ACB ने करीब 5 हजार पन्नों के दस्तावेज भी अदालत में दाखिल किए हैं।चार्जशीट दाखिल होने के बाद लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी सुनील राठौड़ ने शुक्रवार दोपहर ACB कोर्ट में सरेंडर कर दिया।

आरोग्य रथ के नाम पर फर्जी भुगतान का आरोप

मामला स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए चलाए गए आरोग्य रथ से जुड़ा है। ACB के मुताबिक, कागजों में आरोग्य रथों का संचालन दिखाकर फर्जी बिल तैयार किए गए और इनके आधार पर 1 करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान उठाया गया।ACB ने नीरज के. पवन, अकाउंटेंट जोजी वर्गीस, सहायक लेखाधिकारी दीपा गुप्ता, कथित बिचौलिये अजीत सोनी और सुनील राठौड़ के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।ACB के अनुसार, वर्ष 2016 में आरोग्य रथ योजना के दौरान नीरज के. पवन NHM के डायरेक्टर थे। उनके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति वर्ष 2021 में मिली थी।जांच में आरोप है कि आरोग्य रथ के संचालन और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों में अनियमितताएं की गईं। टेंडर से जुड़े दस्तावेज तैयार करने और भुगतान प्रक्रिया में भी कथित तौर पर गड़बड़ी की गई।

फर्मों से 17% कमीशन लेने का आरोप

ACB के एडिशनल एसपी प्रशांत कौशिक के मुताबिक, मामले की जांच में फर्मों से कुल 17% कमीशन लिए जाने की बात सामने आई। इसमें 5% टेंडर जारी करने और 12% बिलों का भुगतान करने के दौरान लिए जाने का आरोप है।जांच एजेंसी ने कमीशन की रकम के कथित बंटवारे का भी उल्लेख चार्जशीट में किया है।जांच के मुताबिक, आरोग्य रथ के प्रचार के लिए NHM की IEC ब्रांच के पास शुरुआती तौर पर करीब 1.60 करोड़ रुपए का बजट था। आरोप है कि बाद में इसे बढ़ाकर करीब 5 करोड़ रुपए कर दिया गया।इसके बाद आरोग्य रथ के संचालन का टेंडर एक फर्म को दिया गया। ACB का आरोप है कि फर्म ने अक्टूबर से दिसंबर 2015 तक करीब तीन महीने काम किया, लेकिन बिलों में रथ के संचालन के दिनों की संख्या वास्तविकता से कहीं ज्यादा दिखाई गई।

552 दिन के बजाय हजारों दिनों का बिल

ACB के मुताबिक, विभागीय जांच में सामने आया कि तीन महीने की अवधि में आरोग्य रथ वास्तव में करीब 552 दिन ही संचालित हुए थे। इसके बावजूद रिकॉर्ड में इससे कहीं ज्यादा दिनों का संचालन दिखाकर भुगतान लिया गया।जांच एजेंसी का आरोप है कि करीब 2 हजार दिनों के फर्जी बिल तैयार किए गए और इनके आधार पर 1 करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान कराया गया।मामले में ACB ने दस्तावेजों और जांच के आधार पर पांच आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। अब आगे की कार्रवाई अदालत में होगी।

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