बिजली चोरी जोरों पर है। अकेले सांगानेर इलाके में एक रेस्टोरेंट समेत चार जगह बिजली चोरी पकड़ी गई। प्रदेश में हर साल हजारों मामले सामने आते हैं, करोड़ों रुपये के जुर्माने लगाए जाते हैं और बड़ी मात्रा में बिजली चोरी पकड़ी जाती है, फिर भी यह अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा। कई जिलों में करोड़ों यूनिट बिजली चोरी का खुलासा हुआ है, जिससे बिजली कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह नुकसान केवल सरकारी कंपनियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसकी कीमत अंततः ईमानदार उपभोक्ताओं को भी चुकानी पड़ती है। पिछले साल 10 जिलों में लगभग 445 करोड़ यूनिट बिजली चोरी पकड़ी गई। इसके चलते अनुमानित आर्थिक नुकसान करीब 1700 करोड़ रुपये बताया गया। इस साल अकेले जयपुर डिस्कॉम की कार्रवाई में 15 मामलों में 51.12 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। वैसे बिजली चोरी रोकने के लिए प्रदेश में 1.42 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य चोरी और राजस्व हानि को कम करना है। हालांकि फिलहाल यह बात झूठी साबित हो रही है।
राजस्थान के ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में एचटी लाइन पर ही सिंगल फेज का ट्रांसफार्मर लगाकर बिजली चोरी की जा रही है। कई लोग अवैध ट्रांसफार्मर लगाकर बिजली चोरी से खेतों में सिंचाई कर रहे हैं। सैकड़ों लोग तो ऐसे हैं जो बिजली कनेक्शन भी नहीं ले रहे हैं ताकि उन्हें बिल नहीं चुकाना पड़े। बिजली चोरी केवल राजस्व हानि का मामला नहीं है, बल्कि यह बिजली व्यवस्था, सरकारी वित्त और ईमानदार उपभोक्ताओं के हितों से जुड़ा गंभीर विषय है। यदि सरकार इस चुनौती का प्रभावी सामना करना चाहती है तो उसे केवल छापेमारी और जुर्माने से आगे बढ़कर दीर्घकालिक रणनीति अपनानी होगी। डिस्कॉम को डेटा एनालिटिक्स, जीपीएस मैपिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग बढ़ाना चाहिए। जिन क्षेत्रों में बिजली हानि असामान्य रूप से अधिक है, वहां विशेष निगरानी रखी जाए। बिजली चोरी के मामलों में लंबी कानूनी प्रक्रिया अपराधियों के हौसले बढ़ाती है। विशेष अदालतों या त्वरित सुनवाई की व्यवस्था कर दोषियों को समय पर दंड दिलाना जरूरी है। जिन क्षेत्रों में लगातार बिजली चोरी सामने आती है, वहां स्थानीय अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। केवल उपभोक्ताओं पर कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा।
बिजली चोरी को कई लोग सामान्य अपराध मान लेते हैं। सरकार को जागरूकता अभियान चलाकर यह बताना चाहिए कि इसका नुकसान पूरे समाज और राज्य की अर्थव्यवस्था को होता है। बिजली चोरी रोकना केवल बिजली कंपनियों का काम नहीं है। सरकार, प्रशासन और समाज तीनों को मिलकर प्रयास करना होगा। जब तक तकनीक, सख्त कानून और सामाजिक जागरूकता का समन्वय नहीं होगा, तब तक करोड़ों रुपये की यह चोरी जारी रहेगी। सरकार के सामने चुनौती बड़ी है, लेकिन यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो तो इस समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। आखिर बिजली चोरी का नुकसान किसी एक विभाग का नहीं, पूरे प्रदेश के विकास का नुकसान है। सबसे अहम बात यह है कि बिजली चोरों को नेता संरक्षण दे रहे हैं। वोटों का लालच कहें या कुछ और फायदे, आखिर आमजन के नुकसान के लिए ये भी तो जिम्मेदार हैं। ऐसे में सख्ती हो, अफसर बिजली चोरों को राहत न दें। जिन इलाकों में बिजली चोरी पकड़ में आए, उसके एईएन-जेईएन पर कार्रवाई की जाए।



