हर बार की तरह इस बार भी गर्मी से बचने के इंतजाम नाकाफी

    गर्मी में लोगों को सुकून मिले, इसके इंतजाम तो पुख्ता होने चाहिएं। हर साल गर्मी आने के बाद हड़बड़ी में इंतजाम करने की बजाय सरकार को स्थायी समाधान की दिशा में काम करना होगा। क्योंकि बढ़ती गर्मी अब चेतावनी नहीं, बल्कि साफ संकेत है कि यदि अभी नहीं संभले तो आने वाले वर्षों में हालात और कठिन होंगे। यह भी देखना होगा कि हर बार इंतजाम पुख्ता क्यों नहीं हो पाते।

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    तेज गर्मी लोगों को झुलसा रही है। अधिकांश शहरों में पारा 43 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है। सरकारी इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। बिजली की अघोषित कटौती ने लोगों को बेहाल कर दिया है तो पानी की भी ठीक ढंग से सप्लाई नहीं हो पा रही। सरकारी अस्पताल-दफ्तरों का हाल किसी से छिपा नहीं है, कहीं-कहीं तो पंखे तक नहीं चल रहे, ठंडे पेयजल की बात तो दूर है। यह हाल अकेले राजधानी जयपुर समेत प्रदेश के अधिकांश हिस्सों का है। गर्मी से पहले तमाम बैठकों में अफसरों ने मंत्रियों के साथ जनता को भरोसा दिलाया था कि इस बार गर्मी में पानी-बिजली की कोई परेशानी नहीं होगी। कटौती के बारे में जब भी मंत्री-अफसर से पूछो तो एक ही जवाब मिलता है, कटौती नहीं, वो तो किसी फॉल्ट के चलते बिजली चली जाती होगी। आलम यह है कि शिकायत करने के कई घंटों बाद तक बिजली नहीं आती। लू से लोग बीमार पड़ रहे हैं, बिजली-पानी की समस्या बढ़ती जा रही है, फिर भी राहत के इंतजाम नाकाफी दिखाई देते हैं। सवाल यह है कि आखिर हर साल आने वाली इस भीषण गर्मी के लिए सरकार और प्रशासन समय रहते ठोस तैयारी क्यों नहीं कर पाते?

    सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि सरकारी अस्पतालों तक में पर्याप्त पंखे, कूलर और पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। मरीज और उनके परिजन उमस में परेशान हैं। कई जगह बिजली कटौती के कारण हालात और खराब हो जाते हैं। यदि अस्पतालों जैसी जरूरी जगह पर ही व्यवस्था कमजोर हो, तो आम मोहल्लों और गांवों की स्थिति सहज ही समझी जा सकती है। जिन अस्पतालों में मरीज राहत और इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहीं उन्हें उमस, अव्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी से बीमार पड़ने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लू, डिहाइड्रेशन और थकावट के मरीज अस्पतालों में पहुंच रहे हैं, लेकिन वार्डों की स्थिति देखकर लगता है जैसे व्यवस्था खुद बीमार हो चुकी हो। मरीजों के साथ आने वाले परिजन घंटों उमस भरे बरामदों में बैठने को मजबूर हैं। कई जगह बिजली कटौती ने हालात और खराब कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि हर साल गर्मी पड़ती है, फिर भी अस्पतालों में समय रहते इंतजाम क्यों नहीं किए जाते? क्या प्रशासन को यह पता नहीं होता कि मई-जून में तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंचेगा? अगर पहले से तैयारी हो, उपकरणों की मरम्मत समय पर हो और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, तो मरीजों को इतनी परेशानी न झेलनी पड़े। दुर्भाग्य यह भी है कि स्वास्थ्य व्यवस्था में जवाबदेही अक्सर नजर नहीं आती। शिकायतें होने के बाद भी सुधार की गति बेहद धीमी रहती है। अस्पतालों में केवल डॉक्टर और दवाइयां ही पर्याप्त नहीं होतीं, बल्कि मरीजों को मानवीय और सुरक्षित वातावरण देना भी उतना ही जरूरी है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग को इस स्थिति को गंभीरता से लेना होगा। अस्पतालों में सभी पंखे, कूलर और एसी तुरंत दुरुस्त किए जाएं, निर्बाध बिजली व्यवस्था सुनिश्चित हो और पीने के पानी की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही गर्मी से निपटने के लिए विशेष हेल्थ प्लान बनाकर अतिरिक्त बेड और मेडिकल स्टाफ की व्यवस्था भी करनी होगी।

    पानी की किल्लत ने लोगों का जीवन मुश्किल बना दिया है। शहरों में अनियमित जलापूर्ति और गांवों में टैंकरों पर निर्भरता यह साबित करती है कि जल प्रबंधन की योजनाएं जमीन पर प्रभावी नहीं हैं। दूसरी तरफ बिजली कटौती ने लोगों की रातों की नींद छीन ली है। गर्मी में राहत देने वाले पंखे-कूलर भी तब बेकार हो जाते हैं जब घंटों बिजली गायब रहे। सरकार को यह समझना होगा कि गर्मी अब केवल मौसमी परेशानी नहीं रही, बल्कि जनस्वास्थ्य और जनजीवन से जुड़ा बड़ा संकट बन चुकी है। केवल एडवाइजरी जारी करने और बैठकें लेने से समस्या हल नहीं होगी। जरूरत है कि अस्पतालों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और बाजारों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर तत्काल राहत इंतजाम किए जाएं। पेयजल केंद्र बढ़ाए जाएं, बिजली व्यवस्था मजबूत की जाए और जलापूर्ति को प्राथमिकता दी जाए। गर्मी में लोगों को सुकून मिले, इसके इंतजाम तो पुख्ता होने चाहिएं। हर साल गर्मी आने के बाद हड़बड़ी में इंतजाम करने की बजाय सरकार को स्थायी समाधान की दिशा में काम करना होगा। क्योंकि बढ़ती गर्मी अब चेतावनी नहीं, बल्कि साफ संकेत है कि यदि अभी नहीं संभले तो आने वाले वर्षों में हालात और कठिन होंगे। यह भी देखना होगा कि हर बार इंतजाम पुख्ता क्यों नहीं हो पाते। सरकारी अस्पताल में मरीज अथवा परिजन या किसी सरकारी दफ्तर में फरियादी को ठंडा पानी और हवा नहीं मिल पाए तो यह बड़े शर्म की बात है। बिजली-पानी के साथ अन्य उन तमाम सुविधाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए जो गर्मी में बेहद जरूरी होती हैं।

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