अवैध कारोबार पर लगाए लगाम, समाज और पुलिस दोनों निभाएं जिम्मेदारी

    स्पा और मसाज पार्लरों की आड़ में यदि कहीं भी अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हैं तो उन पर प्रभावी रोक लगाने की जिम्मेदारी केवल पुलिस की नहीं, बल्कि समाज की भी है। पुलिस को कार्रवाई करने की नियमित निगरानी, समय-समय पर सत्यापन और शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही लाइसेंस की शर्तों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी भी लगातार जांच होनी चाहिए। जिन क्षेत्रों में ऐसे पार्लर संचालित हैं, वहां के निवासी, व्यापारिक संगठन और स्थानीय समितियां भी अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाएं।

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    आए दिन स्पा सेंटर और मसाज पार्लर पर अनैतिक गतिविधियां पकड़ी जा रही हैं। राजधानी जयपुर समेत प्रदेश के अन्य बड़े शहरों में स्पा और मसाज पार्लरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे पार्लरों की है जो पूरी तरह वैध सेवाएं प्रदान करते हैं। लेकिन समय-समय पर पुलिस की कार्रवाई ने यह भी उजागर किया है कि कुछ स्थानों पर स्पा और मसाज की आड़ में अनैतिक और अवैध गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। हाल के वर्षों में जयपुर पुलिस ने कई स्पा सेंटरों पर छापेमारी कर गिरफ्तारियां की हैं और नियमों को सख्ती से लागू करने की दिशा में कदम भी उठाए हैं। 

    सवाल यह है कि यदि शिकायतें लगातार मिलती हैं तो ऐसे पार्लर लंबे समय तक कैसे संचालित होते रहते हैं? क्या लाइसेंस जारी करने के बाद उनकी नियमित निगरानी होती है? क्या स्थानीय प्रशासन, नगर निगम, पुलिस और अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय पर्याप्त है? यदि समय पर निरीक्षण और सत्यापन हो तो अवैध गतिविधियों पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है। एक चिंता यह है कि कुछ लोगों की गैरकानूनी गतिविधियों के कारण पूरे स्पा उद्योग की छवि खराब होती है। हजारों लोग इस क्षेत्र में वैध रोजगार से जुड़े हैं। इसलिए प्रशासन को ऐसे पार्लरों की पहचान स्पष्ट करनी होगी जो नियमों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं और उन पर कार्रवाई करनी होगी जो कानून का उल्लंघन कर रहे हैं। इससे ईमानदारी से व्यवसाय करने वालों का भी संरक्षण होगा। जयपुर पुलिस ने स्पा और मसाज सेंटरों के लिए अलग-अलग पुरुष एवं महिला सेक्शन, पारदर्शी संचालन तथा अन्य सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश लागू किए हैं। इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है जितना उन्हें बनाना।

    स्पा और मसाज पार्लरों की आड़ में यदि कहीं भी अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हैं तो उन पर प्रभावी रोक लगाने की जिम्मेदारी केवल पुलिस की नहीं, बल्कि समाज की भी है। पुलिस को कार्रवाई करने की नियमित निगरानी, समय-समय पर सत्यापन और शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही लाइसेंस की शर्तों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी भी लगातार जांच होनी चाहिए। जिन क्षेत्रों में ऐसे पार्लर संचालित हैं, वहां के निवासी, व्यापारिक संगठन और स्थानीय समितियां भी अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाएं। यदि किसी स्थान पर संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दें तो अफवाह फैलाने के बजाय संबंधित पुलिस थाने या हेल्पलाइन पर सूचना दें। नागरिकों की सतर्कता और पुलिस की सक्रियता मिलकर ही ऐसे अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगा सकती है। कानून का पालन कराने के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वैध रूप से संचालित स्पा और मसाज केंद्रों को अनावश्यक परेशान न किया जाए। कार्रवाई केवल उन्हीं के खिलाफ हो जो कानून का उल्लंघन कर रहे हों।

    स्पा और मसाज पार्लरों की आड़ में यदि कहीं देह व्यापार या अन्य अवैध गतिविधियां संचालित होती हैं, तो इसका प्रभाव केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सामाजिक वातावरण पर भी पड़ता है। ऐसे मामलों से स्थानीय लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ती है, परिवारों और बच्चों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तथा मोहल्लों की सामाजिक पहचान प्रभावित होती है। सबसे अधिक चिंता तब होती है जब आवासीय क्षेत्रों में नियमों की अनदेखी कर ऐसे प्रतिष्ठान संचालित होने लगते हैं। इससे आसपास रहने वाले लोगों में असहजता पैदा होती है और कानून के प्रति भरोसा भी कमजोर पड़ सकता है। इसलिए आवश्यक है कि प्रशासन केवल शिकायत आने का इंतजार न करे, बल्कि नियमित निरीक्षण और प्रभावी निगरानी की व्यवस्था बनाए रखे।

    पुलिस और प्रशासन को नियमित निगरानी, लाइसेंस की समीक्षा, आकस्मिक निरीक्षण और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई को प्राथमिकता देनी होगी। अपराध के खिलाफ समाज की चुप्पी भी अपराधियों का हौसला बढ़ाती है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कार्रवाई तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर हो तथा वैध रूप से संचालित स्पा और वेलनेस केंद्रों को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए।

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