दिल्ली में पाकिस्तान से जुड़े कथित आतंकी और संगठित अपराध मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए सात शातिर गिरफ्तार हुए। ये सीमा पार बैठे आकाओं के इशारे पर दिल्ली-एनसीआर में हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी कर रहे थे। दो महीने पहले भी दिल्ली पुलिस ने एक बड़े आतंकी हमले की साजिश को नाकाम कर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के 9 एजेंटों को दबोचा था। ये संदिग्ध आतंकी दिल्ली को दहलाने की साजिश रच रहे थे। पिछले दिनों जैसलमेर में एक कथित आईएसआई एजेंट को सेना और बीएसएफ की गतिविधियों की जानकारी भेजने के आरोप में पकड़ा गया। कभी लखनऊ तो कभी मुंबई, कभी दिल्ली तो कभी अमृतसर, आए दिन पाकिस्तान की साजिश पकड़ में आ रही है। वो पाक समर्थित भारतीय पकड़ में आ रहे हैं जो जरा से लालच में अपने देश का सौदा कर रहे हैं। ये मॉड्यूल-एजेंट हथियार के साथ मादक पदार्थ की तस्करी तो कर ही रहे हैं, साथ ही खुफिया जानकारी देकर आतंकियों की मदद भी करते हैं। एकअनुमान के मुताबिक पिछले तीन साल में आईएसआई, लश्कर-ए-तैयबा, और अंडरवर्ल्ड के इशारे पर काम कर रहे सौ से अधिक गुर्गे-जासूस पकड़े जा चुके हैं। इनमें से कई स्लीपर सेल और हवाला ऑपरेटर देश के अलग-अलग राज्यों से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गिरफ्तार किए। साल 2023 से 2025 के बीच एनआईए ने ‘टेरर-गैंगस्टर-ड्रग सिंडिकेट’ के खिलाफ कई राज्यों में छापेमारी कर कई पाक समर्थित गुर्गों को गिरफ्तार किया। बार-बार भारतीय पुलिस की कार्रवाई के बाद भी पाक अपनी नापाक हरकत से बाज नहीं आ रहा। ऑपरेशन सिंदूर के बाद ऐसा लगने लगा था कि पाक अब ऐसा नहीं करेगा, यह गलत साबित हुआ।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक भारत केवल ऐसे मॉड्यूल पकड़ता रहेगा? क्या हर गिरफ्तारी के बाद खतरा टल जाता है? सच यह है कि आतंकवाद और जासूसी की रणनीति बदल चुकी है। अब घुसपैठ केवल सीमा पार से हथियार लेकर आने तक सीमित नहीं रही। सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को बरगलाना, एन्क्रिप्टेड ऐप का इस्तेमाल, ड्रोन से हथियारों की तस्करी, सौर ऊर्जा से चलने वाले सीसीटीवी कैमरों से सैन्य ठिकानों की निगरानी और हनी ट्रैप जैसे तरीके अपनाए जा रहे हैं। ऐसे में सबसे पहले खुफिया तंत्र को और आधुनिक तथा तकनीक आधारित बनाना होगा। राज्यों की पुलिस, एटीएस, एनआईए और केंद्रीय एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान की व्यवस्था और मजबूत करनी होगी। सीमा सुरक्षा बलों को अत्याधुनिक उपकरणों से लैस करने के साथ ड्रोन रोधी तकनीक का विस्तार जरूरी है। साथ ही समाज को भी सतर्क होना होगा। कुछ पैसों के लालच में या अनजाने में देश विरोधी गतिविधियों का हिस्सा बनने वाले लोगों के प्रति जागरूकता बढ़ानी होगी। स्कूलों, कॉलेजों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साइबर सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अभियान चलाने होंगे ताकि युवा ऐसे जाल में न फंसें।
इसके अलावा पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार बेनकाब करने की कूटनीतिक नीति जारी रहनी चाहिए। दुनिया को यह बताना होगा कि आतंकवाद किसी एक देश की नहीं, बल्कि वैश्विक शांति की समस्या है। जब तक आतंक को संरक्षण देने वालों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव नहीं बढ़ेगा, तब तक ऐसी गतिविधियां पूरी तरह थमना मुश्किल होगा। भारत ने हर चुनौती का मजबूती से सामना किया है और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता के कारण कई बड़ी साजिशें नाकाम हुई हैं। लेकिन केवल घटनाओं के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। जरूरत ऐसी व्यवस्था की है जो आतंक और जासूसी के नेटवर्क को पनपने से पहले ही कुचल दे। राष्ट्र की सुरक्षा केवल सेना और एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की साझा जवाबदेही है। यदि सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता और नागरिकों की सजगता एक साथ काम करें, तो पाकिस्तान की नापाक हरकतों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। तभी देश सुरक्षित रहेगा और दुश्मन की साजिशें हर बार नाकाम होती रहेंगी। जरा से लालच में दुश्मन देश के लिए काम करने की बढ़ती प्रवृति को हर हाल में रोकना होगा।



