सरकार को हर परीक्षा पर खरा उतरना होगा

    पेपर लीक करने वाले कुछ ही लोग होते हैं पर ऐसा होने से सभी जिम्मेदारों की साख गिरती है। सिस्टम पर सवाल खड़े होते हैं और सरकार से जवाब मांगा जाता है। लाखों युवाओं की उम्मीदें टूटती हैं और कई इसके चलते सुसाइड तक कर लेते हैं। ऐसे में इंतजाम हमेशा पुख्ता हों, परीक्षा से खिलवाड़ करने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो, नकल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई हो। ढिलाई बरतने वालों को भी सबक सिखाया जाए। युवाओं का भरोसा न टूटे, इसके लिए सरकार को हर परीक्षा पर खरा उतरना होगा।

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    देश के 20 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स ने रविवार को नीट की दोबारा परीक्षा दी। सबकुछ शांतिपूर्वक ढंग से संपन्न होने की बात कही जा रही है। देरी से पहुंचने या हिजाब पहनने जैसे कुछ मामलों में परीक्षार्थियों को एग्जाम से वंचित रहना पड़ा। पुख्ता बंदोबस्त के बीच यह परीक्षा हुई। दु:ख तो यह कि परीक्षा के तनाव से जूझ रही दो और छात्राओं ने एग्जाम से ठीक पहले सुसाइड कर लिया। नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले स्टूडेंट्स की संख्या एक दर्जन पार हो चुकी है। पेपर पहले की तुलना में कठिन था, इसको लेकर भी स्टूडेंट्स के अलग-अलग तर्क थे। कुछ की पीड़ा थी कि पहले का पर्चा अच्छा हुआ था।

    असल में परीक्षा में पर्चे लीक होना अब आम बात सी हो गई है। अलग-अलग दावों को मानें तो पिछले दस साल में पांच दर्जन से अधिक परीक्षाओं के पेपर लीक हुए। कई परीक्षाएं रद्द कर दोबारा भी आयोजित हुईं, सरकार और बदइंतजामी पर गुस्सा भी खूब दिखा। हर बार विपक्ष इसे मुद्दा बनाता रहा तो जिम्मेदार यह वादा करते रहे कि अब ऐसा नहीं होगा। एक अनुमान के मुताबिक भारत में 2014 से 2024 में पेपर लीक के मामलों की स्थिति बहुत गंभीर रही है। इस दौरान पेपर लीक के 89 मामलों की पुष्टि होने का दावा किया गया। 21 मामले ऐसे थे जो केंद्रीय संस्थानों (जैसे-एनटीए) की निगरानी में आयोजित की गई परीक्षाओं से संबंधित थे। दावा किया गया कि इन 89 मामलों में या तो एफआईआर दर्ज की गई या फिर परीक्षा को रद्द करना पड़ा। इतना ही नहीं, इन पेपर लीक से करीब 6.5 करोड़ परीक्षार्थियों के भविष्य और समय पर सीधा असर पड़ा। एफआईआर दर्ज हुई, पुलिस ही नहीं सीबीआई तक को जांच सौंपी गई, कुछ पकड़े भी गए पर नतीजा नहीं निकला। अधिकांश आरोपी जमानत पर छूट गए। पेपर लीक का सिलसिला नहीं थमा, इसका मुख्य कारण था कि इसे रोकने के लिए इंतजाम ही पुख्ता नहीं किए गए। सबने औपचारिकता निभाई और नकल माफिया युवाओं के साथ भद्दा मजाक करता रहा। जिम्मेदारों ने अपनी ड्यूटी ही ढंग से नहीं निभाई और आलम यह कि इनमें से अधिकांश के खिलाफ कार्रवाई ही नहीं हुई।

    इस बार नीट के दोबारा एग्जाम में हुई व्यवस्था को जितना सराहा जाए कम है। इस बार जयपुर-दिल्ली समेत अन्य शहरों में नीट एग्जाम को लेकर कतई ढिलाई नहीं बरती गई। होटल ही नहीं बस स्टैण्ड-स्टेशन तक आने वाले परीक्षार्थी अथवा संदिग्धों की पुख्ता जांच-पड़ताल की गई। इस बार न टीचर सुस्त दिखे न पुलिस। कलेक्टर से लेकर एसडीएम तक फील्ड में दिखे। मतलब हर कोई चाहता था कि किसी की चूक से नीट एग्जाम पर फिर कोई ‘दाग’ न लग जाए। परीक्षा चाहें बोर्ड की हो या कॉलेज-विश्वविद्यालय या फिर कोई प्रतियोगी परीक्षा, इंतजाम ऐसे ही होने चाहिएं। पेपर लीक करने वाले कुछ ही लोग होते हैं पर ऐसा होने से सभी जिम्मेदारों की साख गिरती है। सिस्टम पर सवाल खड़े होते हैं और सरकार से जवाब मांगा जाता है। लाखों युवाओं की उम्मीदें टूटती हैं और कई इसके चलते सुसाइड तक कर लेते हैं। ऐसे में इंतजाम हमेशा पुख्ता हों, परीक्षा से खिलवाड़ करने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो, नकल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई हो। ढिलाई बरतने वालों को भी सबक सिखाया जाए। युवाओं का भरोसा न टूटे, इसके लिए सरकार को हर परीक्षा पर खरा उतरना होगा।

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