NPCI Party: तृणमूल कांग्रेस (TMC)के 20 बागी सांसदों ने रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय का एलान कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद अब तक अपेक्षाकृत कम चर्चित रही NCPI अचानक राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई है.
बागी सांसदों के इस कदम ने न केवल पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी है, बल्कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर भी नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई है. यदि यह विलय संसदीय और कानूनी रूप से मान्य हो जाता है, तो एनसीपीआई सांसदों की संख्या के आधार पर NDA की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी बन सकती है.
क्या है NCPI?
चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) को 20 जनवरी 2023 को गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल (RUPP) के रूप में पंजीकृत किया गया था. दिलचस्प बात यह है कि पश्चिम बंगाल में पंजीकरण होने के बावजूद पार्टी ने अपना पहला चुनाव त्रिपुरा विधानसभा चुनाव 2023 में लड़ा था। हालांकि उस चुनाव में पार्टी को कोई सफलता नहीं मिली और उसका एक भी उम्मीदवार जीत दर्ज नहीं कर सका. उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार पार्टी को सीमित समर्थन मिला था और वह राजनीतिक रूप से कोई बड़ी पहचान नहीं बना सकी थी.
TMC के बागी सांसदों का दावा
बागी सांसदों की अगुवाई कर रहीं सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है कि उनके साथ कुल 20 सांसद हैं, जो लोकसभा में TMC के कुल 28 सांसदों का दो-तिहाई से अधिक हिस्सा हैं. सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता देने और संसद में अलग बैठने की मांग की है.
इसके बाद बागी खेमे ने एनसीपीआई के साथ अपने विलय की पुष्टि की है. यदि यह दावा सही साबित होता है, तो दलबदल विरोधी कानून के तहत भी यह मामला महत्वपूर्ण माना जाएगा, क्योंकि दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन से विलय की स्थिति में कानूनी संरक्षण मिलने की संभावना रहती है.
NDA की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि 20 सांसदों का समूह आधिकारिक रूप से एनसीपीआई के बैनर तले एनडीए का समर्थन करता है, तो पार्टी लोकसभा में सांसदों की संख्या के आधार पर दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी बन सकती है. फिलहाल TDP 16 सांसदों के साथ दूसरी सहयोगी पार्टी बनी हुई है.



