वॉशिंगटन। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपने 22 वर्ष पुराने अंतरिक्ष दूरबीन नील गेहरेल्स स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी को पृथ्वी की ओर तेजी से गिरने से बचाने के लिए एक अनोखे रोबोटिक मिशन की शुरुआत की है। यह पहली बार होगा जब किसी अमेरिकी मिशन के तहत एक रोबोटिक अंतरिक्ष यान किसी सक्रिय वैज्ञानिक उपग्रह तक पहुंचकर उसकी कक्षा को ऊपर उठाने का प्रयास करेगा।
स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी को वर्ष 2004 में लॉन्च किया गया था। इसका मूल मिशन केवल दो वर्षों के लिए निर्धारित था, लेकिन इस दूरबीन ने अपनी तय अवधि से कहीं अधिक समय तक काम करते हुए ब्रह्मांड में होने वाले गामा-रे विस्फोट, सुपरनोवा और अन्य दुर्लभ खगोलीय घटनाओं के अध्ययन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आज भी यह वैज्ञानिकों के लिए एक बेहद उपयोगी अंतरिक्ष वेधशाला मानी जाती है। हाल के वर्षों में बढ़ी सौर गतिविधियों के कारण पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल का विस्तार हुआ है, जिससे निम्न कक्षा में मौजूद उपग्रहों पर वायुमंडलीय घर्षण बढ़ गया।
इसी वजह से स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी की कक्षा लगातार नीचे आ रही है। यदि समय रहते इसकी ऊंचाई नहीं बढ़ाई गई, तो आने वाले महीनों में यह पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर नष्ट हो सकती है। इस चुनौती से निपटने के लिए नासा ने एक निजी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनी के साथ मिलकर विशेष रोबोटिक अंतरिक्ष यान तैयार किया है। यह यान स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी तक पहुंचेगा, उसे सुरक्षित तरीके से पकड़कर उसकी कक्षा को अधिक ऊंचाई तक पहुंचाने का प्रयास करेगा। यदि मिशन सफल रहता है, तो दूरबीन का वैज्ञानिक जीवन कई वर्षों तक बढ़ाया जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह मिशन केवल एक दूरबीन को बचाने तक सीमित नहीं है। इसकी सफलता भविष्य में अंतरिक्ष में मौजूद पुराने उपग्रहों और वैज्ञानिक उपकरणों की मरम्मत, रखरखाव और ईंधन भरने जैसी नई संभावनाओं का रास्ता खोल सकती है। इससे महंगे अंतरिक्ष मिशनों की लागत कम करने और अंतरिक्ष मलबे की समस्या से निपटने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञ इस अभियान को बेहद चुनौतीपूर्ण मान रहे हैं, क्योंकि किसी सक्रिय उपग्रह तक पहुंचकर उसे नियंत्रित तरीके से पकड़ना और उसकी कक्षा बदलना अत्यंत जटिल प्रक्रिया है। यदि यह प्रयास सफल होता है, तो यह अंतरिक्ष सेवा तकनीक के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी और भविष्य के कई मिशनों के लिए नई दिशा तय करेगा।



