जोधपुर। जोधपुर जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट ने 20 दिन की नियमित पैरोल मंजूर की थी। यह उनके लिए पहली नियमित पैरोल बताई गई है। कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से पैरोल आवेदन खारिज किए जाने को उचित नहीं माना और 20 दिन के लिए रिहाई का आदेश दिया था।हालांकि, पैरोल आदेश के बाद उनकी रिहाई को लेकर मामला फिर अदालत पहुंच गया। आसाराम की ओर से उनके वकीलों ने हाईकोर्ट का रुख किया और रिहाई के आदेश पर अमल से जुड़े सवाल उठाए। अब हाईकोर्ट ने राजस्थान सरकार से इस संबंध में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होने की बात सामने आई है।
सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल बेल देने से किया इनकार
इसी बीच आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत नहीं मिली। शीर्ष अदालत ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति से जुड़ी याचिका पर फिलहाल अंतरिम जमानत देने से इनकार किया, हालांकि स्वास्थ्य बिगड़ने की स्थिति में दोबारा अदालत का रुख करने की गुंजाइश रखी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने AIIMS की मेडिकल रिपोर्ट पर भी विचार किया। रिपोर्ट के मुताबिक आसाराम को तत्काल अस्पताल में भर्ती रखने की जरूरत नहीं बताई गई, लेकिन उनकी उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए लगातार देखभाल की जरूरत बताई गई। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें अपनी पसंद का प्रशिक्षित केयरगिवर 24 घंटे उपलब्ध रखने की अनुमति दी।
पैरोल और सुप्रीम कोर्ट की जमानत में क्या अंतर है?
इस मामले में पैरोल और अंतरिम जमानत को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। पैरोल जेल की सजा काट रहे कैदी को निर्धारित शर्तों के तहत कुछ समय के लिए जेल से बाहर रहने की अनुमति होती है, जबकि अंतरिम जमानत अदालत द्वारा किसी लंबित मामले में अस्थायी राहत होती है। आसाराम के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने 20 दिन की नियमित पैरोल को मंजूरी दी है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत देने से फिलहाल इनकार किया है।
आसाराम पर क्या है मामला?
आसाराम नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। राजस्थान हाईकोर्ट ने जून 2026 में उनकी उम्रकैद की सजा बरकरार रखी थी। इसके बाद स्वास्थ्य और जेल से बाहर रहने की अनुमति को लेकर उनका मामला लगातार अदालतों में सामने आता रहा है।
अब 17 अगस्त पर टिकी नजर
फिलहाल आसाराम की पैरोल और उनकी रिहाई को लेकर कानूनी स्थिति पर राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है। कोर्ट द्वारा राज्य सरकार से जवाब मांगे जाने के बाद अब 17 अगस्त की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि हाईकोर्ट के 20 दिन की पैरोल के आदेश पर अमल क्यों नहीं हुआ और आगे आसाराम की रिहाई को लेकर क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी।



