नई दिल्ली। उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की सार्वजनिक गतिविधियों में लंबे अंतराल ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। जून की शुरुआत में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्योंगयांग यात्रा के दौरान किम की सार्वजनिक मौजूदगी के बाद उनकी गतिविधियां सीमित नजर आईं। इसके बाद उनकी नई तस्वीरों और सार्वजनिक कार्यक्रमों को लेकर सवाल उठने लगे। किम जोंग उन आमतौर पर उत्तर कोरिया की सरकारी परियोजनाओं, सैन्य कार्यक्रमों और बड़े राष्ट्रीय आयोजनों में प्रमुखता से नजर आते हैं। ऐसे में लंबे समय तक उनकी कम सार्वजनिक मौजूदगी ने स्वास्थ्य और उनके ठिकाने को लेकर अटकलों को हवा दी। हालांकि, अब यह साफ है कि किम पूरी तरह सार्वजनिक जीवन से गायब नहीं थे।
27 जुलाई को अचानक सामने आए किम
कोरियाई युद्धविराम की 73वीं वर्षगांठ के मौके पर किम जोंग उन सार्वजनिक कार्यक्रम में दिखाई दिए। उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया के मुताबिक, उन्होंने युद्ध में मारे गए सैनिकों की याद में बने स्मारकों और कब्रिस्तानों का दौरा किया। किम ने फादरलैंड लिबरेशन वॉर मार्टियर्स सेमेट्री और चीनी पीपुल्स वॉलंटियर्स के शहीद सैनिकों के स्मारक पर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने युद्ध के दिग्गज सैनिकों से भी मुलाकात की। इसके बाद 27 जुलाई को प्योंगयांग में आयोजित समारोह और परेड में भी किम जोंग उन मौजूद रहे। सरकारी तस्वीरों में वह वरिष्ठ अधिकारियों के साथ नजर आए।
बेटी किम जू-ए के साथ नजर आए
इस कार्यक्रम की एक खास बात किम जोंग उन की बेटी किम जू-ए की मौजूदगी रही। वह अपने पिता के साथ युद्धविराम वर्षगांठ से जुड़े कार्यक्रमों में नजर आईं।किम जू-ए की सार्वजनिक मौजूदगी पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ी है। दक्षिण कोरियाई अधिकारियों और विश्लेषकों ने भी उनकी बढ़ती सार्वजनिक भूमिका को उत्तर कोरिया के भविष्य के नेतृत्व से जुड़ी संभावनाओं के संदर्भ में देखा है।
जून के बाद क्यों कम दिखे किम?
किम जोंग उन की सार्वजनिक गतिविधियों में कमी की कोई स्पष्ट आधिकारिक वजह उत्तर कोरिया की ओर से नहीं बताई गई है। इसी वजह से सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में उनके स्वास्थ्य से लेकर निजी कार्यक्रमों तक कई तरह के अनुमान लगाए गए। कुछ जगहों पर उनकी तबीयत खराब होने और यहां तक कि उनकी मौत या बॉडी डबल के इस्तेमाल जैसे दावे भी किए गए। हालांकि, इन गंभीर दावों की कोई विश्वसनीय पुष्टि नहीं हुई है। किम का 27 जुलाई के कार्यक्रम में सार्वजनिक रूप से सामने आना भी ऐसी अटकलों को कमजोर करता है।
शी जिनपिंग की यात्रा के बाद बढ़ी थी चर्चा
किम जोंग उन की आखिरी प्रमुख सार्वजनिक गतिविधियों में जून में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्योंगयांग यात्रा भी शामिल थी। दोनों नेताओं के बीच मुलाकात के बाद उत्तर कोरिया और चीन ने संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया था। इसके बाद किम की सार्वजनिक मौजूदगी कम होने से उनकी गतिविधियों पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के बीच चर्चा बढ़ गई थी।
तो क्या सच में 2 महीने गायब थे किम?
किम जोंग उन की सार्वजनिक मौजूदगी में लंबा अंतराल जरूर देखने को मिला, लेकिन उन्हें पूरी तरह ‘गायब’ कहना सही नहीं होगा। 27 जुलाई को उनकी मौजूदगी की पुष्टि उत्तर कोरियाई सरकारी मीडिया की तस्वीरों और रिपोर्टों से हुई है। इसलिए फिलहाल सबसे अहम सवाल यह नहीं है कि किम जोंग उन कहां गायब थे, बल्कि यह है कि जून के बाद उनकी सार्वजनिक गतिविधियां इतनी सीमित क्यों रहीं। उनके स्वास्थ्य या निजी कार्यक्रमों को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में सोशल मीडिया पर चल रहे अपुष्ट दावों को तथ्य मानना सही नहीं होगा।



