Saturday, August 8, 2026
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UPI पर MDR की वापसी! क्या अमेरिका के दबाव में UPI नीतियां बदल रहा है भारत?

भारत में UPI पर MDR यानी Merchant Discount Rate दोबारा लागू करने को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि सरकार ने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है और आम लोगों के UPI भुगतान को मुफ्त रखने की बात कही जा रही है। इस बीच GTRI ने अमेरिकी व्यापार नीति और UPI-RuPay को लेकर उठाए गए सवालों पर चिंता जताई है। सवाल यह है कि क्या UPI पर MDR के पीछे विदेशी कंपनियों का कोई दबाव है और अगर शुल्क लागू हुआ तो इसका फायदा किसे मिलेगा?

नई दिल्ली। भारत में डिजिटल पेमेंट की तस्वीर बदलने वाले UPI को शुरू हुए करीब एक दशक हो चुका है। कोरोना महामारी के दौरान UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा और आज सब्जी खरीदने से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग तक करोड़ों लोग इसका इस्तेमाल करते हैं। जनवरी 2020 से UPI और RuPay डेबिट कार्ड के लिए MDR को शून्य किया गया था। सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए यह व्यवस्था लागू की थी। आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक UPI P2M लेनदेन पर MDR वर्तमान में शून्य है। अब पेमेंट इकोसिस्टम की लागत और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश को लेकर UPI पर MDR की संभावित वापसी की चर्चा शुरू हुई है। हालांकि, अभी MDR की दर या इसे लागू करने को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

आम आदमी को देना होगा UPI का चार्ज?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर MDR वापस आया तो क्या इसका असर सीधे आम UPI यूजर की जेब पर पड़ेगा? फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक संभावित MDR मुख्य रूप से मर्चेंट यानी व्यापारी पर लागू होने की चर्चा में है, न कि आम ग्राहक पर। इसका मतलब यह है कि व्यक्ति से व्यक्ति पैसे भेजने या सामान्य छोटे व्यापारियों को UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों पर सीधे शुल्क लगाने की बात नहीं है। हालांकि, अंतिम नियम और शुल्क संरचना तय होने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी।

MDR क्या होता है?

MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए व्यापारी के भुगतान सेवा प्रदाता या बैंक को देना पड़ सकता है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी बड़े व्यापारी के लिए MDR 0.20 प्रतिशत तय होता है और ग्राहक ₹10,000 का भुगतान करता है, तो शुल्क ₹20 के आसपास हो सकता है। वास्तविक दर, सीमा और शुल्क किस पक्ष द्वारा वहन किया जाएगा, यह सरकार के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।

सरकार MDR पर क्यों कर सकती है विचार?

UPI ट्रांजेक्शन की संख्या लगातार बढ़ने के साथ बैंक, पेमेंट कंपनियां और टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बड़े पैमाने पर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर चला रहे हैं। सर्वर, साइबर सुरक्षा, नेटवर्क और भुगतान प्रणाली को बनाए रखने में लगातार निवेश की जरूरत होती है। सरकार पहले से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए इंसेंटिव स्कीम चला रही है। वित्त मंत्रालय की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार 2021 से 2025 के बीच डिजिटल ट्रांजेक्शन करीब 11 गुना बढ़े और कुल डिजिटल लेनदेन में UPI की हिस्सेदारी करीब 80 प्रतिशत तक पहुंची। इसी पृष्ठभूमि में यह बहस हो रही है कि बड़े मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर सीमित MDR से पेमेंट इकोसिस्टम को अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है।

क्या अमेरिका का भी है कोई एंगल?

यहीं से इस पूरे मामले में विदेशी दबाव की चर्चा शुरू होती है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने 31 मार्च 2026 को अपनी National Trade Estimate रिपोर्ट जारी की, जिसमें अमेरिका के सामने मौजूद विदेशी व्यापार बाधाओं पर चर्चा की गई है। GTRI ने इसी व्यापक संदर्भ में UPI और RuPay से जुड़े अमेरिकी रुख पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि भारत को अपने डिजिटल पेमेंट सिस्टम के संबंध में किसी बाहरी दबाव में आने की जरूरत नहीं है। हालांकि, यह कहना कि UPI पर MDR लगाने का फैसला सीधे अमेरिका के दबाव में लिया जा रहा है, अभी साबित नहीं हुआ है। इसे फिलहाल एक आर्थिक और नीतिगत बहस के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

अमेरिकी कंपनियों को हो सकता है फायदा?

UPI इकोसिस्टम में विदेशी टेक कंपनियों की बड़ी मौजूदगी है। PhonePe और Google Pay जैसे प्लेटफॉर्म भारत में UPI भुगतान के क्षेत्र में बड़े खिलाड़ी हैं।दूसरी तरफ Visa और Mastercard जैसे कार्ड नेटवर्क भी भारतीय डिजिटल भुगतान बाजार में सक्रिय हैं। UPI पर MDR लागू होने की स्थिति में कार्ड और UPI भुगतान के बीच व्यापारियों के लिए लागत का अंतर बदल सकता है। लेकिन इससे यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा कि MDR का प्रस्ताव किसी एक विदेशी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए बनाया जा रहा है। इसका वास्तविक प्रभाव MDR की दर, ट्रांजेक्शन की सीमा और शुल्क के वितरण मॉडल पर निर्भर करेगा।

बड़े कारोबारियों पर ही क्यों हो सकता है फोकस?

MDR को लेकर चर्चा में एक संभावित मॉडल बड़े मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर सीमित शुल्क लगाने का है। इससे छोटे दुकानदारों और आम ग्राहकों पर सीधा असर कम रखने की कोशिश की जा सकती है। यही वजह है कि UPI के भविष्य को लेकर असली सवाल यह है कि अगर MDR आता है तो कितनी रकम पर, किन व्यापारियों पर और कितनी दर से लागू होगा।

UPI पर MDR आया तो किसे फायदा और किसे नुकसान?

अगर सीमित MDR लागू होता है तो पेमेंट इकोसिस्टम में काम करने वाली कंपनियों और बैंकों को अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है। इससे डिजिटल भुगतान के इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सुरक्षा में निवेश बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद की जा सकती है। वहीं, बड़े व्यापारियों के लिए डिजिटल भुगतान की लागत बढ़ सकती है। कुछ कारोबारी इस अतिरिक्त लागत को अपने मार्जिन से वहन कर सकते हैं, जबकि कुछ परिस्थितियों में इसका अप्रत्यक्ष असर कीमतों पर भी पड़ सकता है। लेकिन आम UPI ग्राहक पर सीधा शुल्क लगेगा या नहीं, यह अंतिम नियमों पर निर्भर करेगा।

फिलहाल UPI फ्री रहेगा या बदलेगा नियम?

इस समय UPI को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि MDR लागू करने पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। सरकार की मौजूदा नीति में UPI P2M पर MDR शून्य है और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सरकार इंसेंटिव भी देती रही है। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि UPI पर चार्ज लगना तय हो गया है। आने वाले समय में अगर सरकार और संबंधित संस्थाएं MDR की नई व्यवस्था पर फैसला करती हैं, तभी यह स्पष्ट होगा कि शुल्क किस पर और कितना लगेगा।

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