बिश्केक। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सोमवार को एक बार फिर ‘कार डिप्लोमेसी’ देखने को मिली। शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों नेता एक ही कार में सवार होकर बिश्केक एरीना में आयोजित छठे विश्व नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह के लिए रवाना हुए। दोनों नेताओं के बीच कार में साथ यात्रा की तस्वीरें और वीडियो कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बने।
मोदी और पुतिन की यह पहली साझा कार यात्रा नहीं है। इससे पहले दोनों नेता 2025 में चीन के तियानजिन में हुए एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान भी एक ही वाहन में साथ नजर आए थे। दिसंबर 2025 में पुतिन की भारत यात्रा के दौरान भी दोनों नेताओं ने साथ कार में सफर किया था। लगातार सामने आ रही इन तस्वीरों को भारत-रूस के बीच व्यक्तिगत विश्वास और मजबूत संबंधों के प्रतीक के तौर पर देखा जा रहा है।
मुलाकात में युद्ध और शांति पर चर्चा
कार यात्रा से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ सम्मेलन के दौरान पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध समेत विभिन्न अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। मोदी ने कहा कि दुनिया को लगातार चल रहे युद्ध से बाहर निकलकर उसके शांतिपूर्ण अंत की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने शांति के प्रयासों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
बैठक में मोदी ने पुतिन को सितंबर में नई दिल्ली में प्रस्तावित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने का औपचारिक न्योता दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करेगी तथा ब्रिक्स के मंच पर सहयोग बढ़ाने में मददगार होगी।
पुतिन ने मोदी के प्रयासों को सराहा
रूसी राष्ट्रपति ने भारत-रूस संबंधों को मजबूत बनाए रखने में प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका की प्रशंसा की। पुतिन ने कहा कि वह भारत और रूस के रिश्तों पर मोदी के विशेष ध्यान तथा दोनों देशों के बीच विकसित हुए मैत्रीपूर्ण और कारोबारी संबंधों के लिए आभारी हैं। मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से हाथ मिलाया और एक-दूसरे को गले लगाया।
उज्बेकिस्तान में भी दिखी ‘कार डिप्लोमेसी’
मोदी की ‘कार डिप्लोमेसी’ की चर्चा इससे पहले उज्बेकिस्तान दौरे के दौरान भी हुई थी। ताशकंद पहुंचने पर राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने उनका स्वागत किया। इसके बाद दोनों नेता हवाईअड्डे से राष्ट्रपति भवन तक एक ही कार में साथ गए। वहां दोनों ने रात्रिभोज के दौरान बातचीत की और आपसी संबंधों पर चर्चा की। भारत और रूस के नेताओं की साझा कार यात्रा की परंपरा ने अब कूटनीतिक मेलजोल के एक अनौपचारिक लेकिन प्रभावी अंदाज के रूप में अपनी अलग पहचान बना ली है।



