मुंबई। Mirzapur The Movie को लेकर इन दिनों काफी चर्चा है। फिल्म के ट्रेलर में दिखाई गई जबरदस्त हिंसा और बोल्ड सीन्स ने रिलीज से पहले ही दर्शकों का ध्यान खींच लिया था। अब फिल्म के इंटीमेट कंटेंट को लेकर सेंसर बोर्ड की ओर से किए गए बदलाव की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने फिल्म के कुछ इंटीमेट सीन्स में विजुअल और साउंड लेवल पर बदलाव करने को कहा है। जानकारी के अनुसार, फिल्म के दो अलग-अलग हिस्सों में कट लगाए गए हैं।
35 सेकेंड के इंटीमेट कंटेंट पर चली कैंची
रिपोर्ट्स की मानें तो फिल्म में करीब 35 सेकेंड के इंटीमेट कंटेंट को हटाया गया है। इसके अलावा संबंधित दोनों दृश्यों की अवधि को भी करीब 50 फीसदी तक कम किए जाने की बात कही जा रही है। एक बदलाव फिल्म के पहले हाफ में और दूसरा दूसरे हाफ में किया गया है। यानी सेंसर बोर्ड ने इन दृश्यों को पूरी तरह हटाने के बजाय उनकी अवधि और प्रस्तुति में बदलाव का रास्ता अपनाया है। यही वजह है कि फिल्म के सेंसर सर्टिफिकेशन को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।
ट्रेलर में इस सीन ने खींचा था ध्यान
‘मिर्जापुर द मूवी’ के ट्रेलर में एक ऐसा सीन भी दिखाया गया था, जिसने सोशल मीडिया पर काफी चर्चा बटोरी। एक तरफ गोलीबारी और एक्शन का माहौल नजर आता है, वहीं दूसरी तरफ एक इंटीमेट स्थिति दिखाई गई थी। इस दृश्य में मुन्ना त्रिपाठी का किरदार निभाने वाले दिव्येंदु एक महिला के साथ इंटीमेट स्थिति में नजर आते हैं। इस सीन को लेकर कुछ दर्शकों और आलोचकों ने सवाल भी उठाए थे। आलोचना सिर्फ बोल्डनेस तक सीमित नहीं रही, बल्कि सीन में महिला किरदार की प्रस्तुति को लेकर भी सवाल उठे।
OTT से थिएटर तक पहुंची ‘मिर्जापुर’ की दुनिया
‘मिर्जापुर’ फ्रेंचाइजी की सबसे बड़ी खासियतों में से एक इसकी हिंसक और बोल्ड प्रस्तुति रही है। इसके पिछले सीजन OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुए, जहां दर्शक निजी स्क्रीन पर कंटेंट देखने का फैसला खुद कर सकते थे। लेकिन ‘मिर्जापुर द मूवी’ के सिनेमाघरों में रिलीज होने के साथ स्थिति अलग है। बड़े पर्दे पर फिल्म देखने के लिए अलग-अलग उम्र और पृष्ठभूमि के दर्शक एक ही जगह मौजूद होते हैं। यही वजह है कि फिल्म में दिखाए जाने वाले बोल्ड और हिंसक कंटेंट को लेकर सेंसर बोर्ड की भूमिका चर्चा का विषय बन गई है।
क्या सिर्फ ‘एडल्ट’ सर्टिफिकेट काफी है?
फिल्म के मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर किसी फिल्म को वयस्क दर्शकों के लिए प्रमाणित किया जाता है, तो उसमें बोल्ड और हिंसक कंटेंट की सीमा कितनी होनी चाहिए? एक तरफ फिल्मकार कहानी और किरदारों की जरूरत के मुताबिक ऐसे दृश्यों को जरूरी बता सकते हैं, वहीं सेंसर बोर्ड को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली फिल्मों की प्रस्तुति को निर्धारित नियमों के आधार पर देखना होता है। ‘मिर्जापुर द मूवी’ को लेकर भी अब बहस इसी बात पर है कि एडल्ट कंटेंट की सीमा कौन तय करेगा- फिल्मकार, सेंसर बोर्ड या दर्शक?
पहले भी बोल्ड सीन्स को लेकर उठते रहे हैं सवाल
भारतीय फिल्मों में किसिंग, रोमांस और इंटीमेट सीन्स पर सेंसर बोर्ड के फैसले को लेकर पहले भी बहस होती रही है। कई फिल्मों में कुछ सेकेंड के दृश्यों पर कट लगाए जाने को लेकर सवाल उठे हैं। वहीं, दूसरी तरफ जब फिल्मों में हिंसा और बोल्डनेस का स्तर काफी ज्यादा होता है, तो दर्शकों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सभी फिल्मों के लिए सेंसर की कसौटी एक जैसी है। ‘मिर्जापुर द मूवी’ के मामले में भी यही चर्चा अब जोर पकड़ रही है।
गुरमीत सिंह ने पहले ही कही थी ये बात
फिल्म के निर्देशक गुरमीत सिंह पहले ही संकेत दे चुके हैं कि फिल्म को वयस्क दर्शकों के लिए बनाए जाने की उम्मीद थी। ऐसे में सेंसर बोर्ड की ओर से इंटीमेट सीन्स में बदलाव की खबर ने फिल्म की रिलीज को लेकर उत्सुकता और बढ़ा दी है। अब देखना होगा कि सिनेमाघरों में दर्शकों को ‘मिर्जापुर द मूवी’ का कितना बदला हुआ वर्जन देखने को मिलता है और फिल्म के बोल्ड कंटेंट को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रिया कैसी रहती है।



