Anita Kushwah Suspension : जयपुर। बयाना विधायक ऋतु बनावत (MLA Ritu Banawat) और नगर पालिका बयाना की अधिशासी अधिकारी (ईओ) अनीता कुशवाह के बीच हुए विवाद के बाद राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। स्वायत्त शासन विभाग ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए ईओ अनीता कुशवाह (Anita Kushwaha) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अनीता कुशवाह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव पारित होने के बाद यह कदम उठाया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय स्थानीय निकाय विभाग (डीएलबी) निदेशालय, जयपुर निर्धारित किया गया है।
बता दें कि गुरुवार को बयाना में आयोजित एक बैठक के दौरान विधायक ऋतु बनावत और ईओ अनीता कुशवाह के बीच किसी मुद्दे को लेकर विवाद बढ़ गया था। देखते ही देखते मामला तीखी बहस में बदल गया और बैठक का माहौल गरमा गया। विधायक और ईओ के बीच हुई तीखी नोकझोंक का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। वीडियो सामने आने के बाद पूरे घटनाक्रम ने तूल पकड़ लिया और सरकार तक इसकी गूंज पहुंची।

बयाना विवाद पर सरकार ने लिया बड़ा प्रशासनिक फैसला
इस घटनाक्रम के बाद स्वायत्त शासन विभाग ने कड़ा कदम उठाते हुए अनीता कुशवाह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम 13(1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह कार्रवाई की गई है।
आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान अनीता कुशवाह का मुख्यालय डीएलबी निदेशालय, जयपुर रहेगा। साथ ही, उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वहन भत्ता दिया जाएगा, जिसका भुगतान बयाना नगर पालिका द्वारा किया जाएगा। विधायक और ईओ के बीच हुई तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया था। अब इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है और कांग्रेस ने सरकार को निशाने पर लेते हुए इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं।
जनप्रतिनिधियों की अनदेखी पर कांग्रेस ने जताई नाराजगी
बयाना प्रकरण को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि विधायक ऋतु बनावत के साथ नगर पालिका ईओ का व्यवहार न केवल निंदनीय है, बल्कि यह जनप्रतिनिधियों के सम्मान और निर्धारित प्रोटोकॉल की भी अवहेलना है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में अफसरशाही पूरी तरह बेलगाम हो चुकी है और अधिकारी जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की बात सुनने को भी तैयार नहीं हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा गंभीर चिंता का विषय है।
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब एक निर्वाचित विधायक की बात को इस तरह नजरअंदाज किया जा सकता है, तो आम जनता की समस्याओं और शिकायतों के समाधान की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। पार्टी ने सरकार से प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने और ऐसे मामलों में उचित कार्रवाई की मांग की है।
टीकराम जूली ने त्वरित कार्रवाई करने की मांग की
बयाना विवाद को लेकर कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री से मामले का गंभीरता से संज्ञान लेने और त्वरित कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक अधिकारी और विधायक के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था, जनप्रतिनिधियों की गरिमा और जनता के जनादेश के सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। टीकाराम जूली ने कहा कि लोकतंत्र में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की बात को नजरअंदाज करना उचित नहीं है और इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं, सरकार द्वारा नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी (ईओ) अनीता कुशवाह को निलंबित किए जाने के बाद पूरे घटनाक्रम की चर्चा और तेज हो गई है।



