Madan Dilawar On Kirodi Meena: कृषि विभाग में एसीबी की कार्रवाई के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. कांग्रेस नेताओं द्वारा कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा पर लगाए गए आरोपों के बीच शिक्षा मंत्री मदन दिलावर खुलकर उनके बचाव में उतर आए हैं. मदन दिलावर ने कहा कि वह छात्र जीवन से ही किरोड़ी लाल मीणा को जानते हैं और उनकी ईमानदारी पर सवाल नहीं उठाया जा सकता. इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि “अगर किरोड़ी लाल मीणा बेईमान हैं तो फिर मैं कभी ईमानदार नहीं हो सकता.”
दिलावर ने बताया कि जब किरोड़ी लाल मीणा बीकानेर मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे, तब वह स्वयं पॉलिटेक्निक कॉलेज में छात्र थे. उन्होंने कहा कि दशकों से उनके संपर्क में रहने के कारण वह उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली से भलीभांति परिचित हैं. उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि दूसरों पर आरोप लगाने से पहले कांग्रेस के नेता अपने गिरेबान में झांक कर देखें.
अशोक गहलोत पर साधा निशाना
दिलावर ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर हमला बोला. उन्होंने सवाल उठाया कि जल जीवन मिशन से जुड़े कथित घोटाले में पूर्व मंत्री महेश जोशी ने उन्हें कितनी राशि पहुंचाई थी, इसका जवाब जनता को मिलना चाहिए. साथ ही उन्होंने पूर्व IAS अधिकारी सुबोध अग्रवाल से जुड़े मामलों पर भी गहलोत से स्पष्टीकरण मांगा.
डोटासरा पर बोला तीखा हमला
शिक्षा मंत्री ने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को लेकर भी तीखा बयान दिया. उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) में जांच चल रही है और जांच पूरी होने के बाद उन्हें भी महेश जोशी की तरह कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है और उन्हें जेल भी जाना पड़ा सकता है.
गहलोत-पायलट विवाद पर कही ये बात
सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर दिलावर ने कहा कि किसी भी नेता को अपने ही सहयोगी के लिए “मक्कार” और “नकारा” जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए. उन्होंने इसे राजनीतिक मर्यादा के विपरीत और अनुचित बताया. यह टिप्पणी सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद के संदर्भ में की गई. इस तरह की भाषा का इस्तेमाल राजनीति में उचित नहीं माना जा सकता.
‘राज्य सरकार भ्रष्टाचार के प्रति पूरी तरह गंभीर’
कृषि विभाग में एसीबी की कार्रवाई को लेकर शिक्षा मंत्री ने कहा कि किसी भी विभाग में कोई भी व्यक्ति भ्रष्टाचार में शामिल हो सकता है, लेकिन उसके खिलाफ कार्रवाई होना इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के प्रति पूरी तरह गंभीर है.
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का किसी मंत्री या अधिकारी से मिलना-जुलना इस बात का प्रमाण नहीं हो सकता कि वह भ्रष्टाचार में शामिल है. राज्य सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांत पर काम कर रही है और भ्रष्टाचार के मामलों में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा.
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