New Army Chief: केंद्र सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को भारतीय सेना का अगला प्रमुख ((Chief of the Army Staff – COAS) नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है. वर्तमान में उप सेना प्रमुख (वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ) के पद पर कार्यरत धीरज सेठ 30 जून को देश के 31वें आर्मी चीफ के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे. वे मौजूदा सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो रहा है. भारतीय सेना में आर्मी चीफ का कार्यकाल 3 वर्ष या 62 वर्ष की आयु तक होता है, इनमें से जो भी पहले पूरा हो.
जनरल धीरज सेठ की शिक्षा
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने पुणे के खड़कवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) और देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) से सैन्य शिक्षा प्राप्त की है. इसके अलावा वे डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज (DSSC), महू के आर्मी वॉर कॉलेज और नई दिल्ली के नेशनल डिफेंस कॉलेज के भी पूर्व छात्र रहे हैं.
वर्ष 2006 में उन्हें DSSC में अपने कोर्स का सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंड स्टूडेंट चुना गया था. उन्होंने फ्रांस के कॉलेज इंटरआर्मे डी डिफेंस में जनरल स्टाफ कोर्स तथा अमेरिका के नेवल पोस्टग्रेजुएट स्कूल में इंटरनेशनल डिफेंस एक्विजिशन मैनेजमेंट कोर्स भी किया है. सैन्य प्रशिक्षण के दौरान उन्हें यंग ऑफिसर्स कोर्स में प्रतिष्ठित ‘सिल्वर सेंचुरियन’ सम्मान भी प्राप्त हुआ था.
करीब 4 दशक का सैन्य अनुभव
दिसंबर 1986 में आर्मर्ड कोर में कमीशन प्राप्त करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ के पास लगभग 40 वर्षों का सैन्य अनुभव है. उन्होंने रेगिस्तानी क्षेत्रों, जम्मू-कश्मीर और पश्चिमी सीमा सहित कई संवेदनशील मोर्चों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं.
वे दक्षिण-पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (GOC-in-C) भी रह चुके हैं. इसके अलावा पश्चिमी मोर्चे पर 2 महत्वपूर्ण ऑपरेशनल कमानों का नेतृत्व करने वाले चुनिंदा अधिकारियों में उनकी गिनती होती है. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के अंगोला मिशन, सेना मुख्यालय और क्षमता विकास से जुड़े विभिन्न रणनीतिक पदों पर भी सेवाएं दी हैं.
कई प्रतिष्ठित सम्मान से सम्मानित
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ अपनी उत्कृष्ट सेवाओं और नेतृत्व क्षमता के लिए कई सैन्य सम्मान प्राप्त कर चुके हैं. उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM), उत्तम युद्ध सेवा मेडल (UYSM) और अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) से नवाजा जा चुका है.
उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारतीय सेना आधुनिक सैन्य क्षमताओं के विकास, सीमा सुरक्षा और आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उनके व्यापक अनुभव और रणनीतिक नेतृत्व से भारतीय सेना को नई दिशा मिलेगी.
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