Kota News: कोटा में इलाज के दौरान 5 प्रसूताओं की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. जांच में सामने आया है कि प्रसूताओं को लगाए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन में दवा की मात्रा शून्य पाई गई. इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग और ड्रग कंट्रोल विभाग में हड़कंप मच गया है. ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट ने कार्रवाई करते हुए हजारों इंजेक्शन जब्त कर लिए हैं. बताया जा रहा है कि यह इंजेक्शन अमृतसर की एक कंपनी से मंगवाए गए थे.
16 हजार इंजेक्शन मंगवाए गए थे
जानकारी के अनुसार, कुल 16 हजार इंजेक्शन की सप्लाई की गई थी, जिनमें से 12,499 इंजेक्शन पहले ही इस्तेमाल किए जा चुके हैं. बाकी बचे 3,501 इंजेक्शन को जब्त कर लिया गया है. अब जांच के लिए विभागीय टीम अमृतसर जाएगी.
इंजेक्शनों में नहीं मिला ऑक्सीटोसिन
मामला न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल और जेके लोन अस्पताल से जुड़ा हुआ है. जांच में पाया गया कि जिन ऑक्सीटोसिन इंजेक्शनों का उपयोग प्रसूताओं के इलाज में किया गया था, उनमें ऑक्सीटोसिन की सक्रिय मात्रा मौजूद ही नहीं थी. ड्रग कंट्रोल टीम के देवेंद्र गर्ग ने बताया कि सैंपल जांच में इंजेक्शन का एक बैच फेल पाया गया है. रिपोर्ट मिलने के बाद अस्पतालों और सप्लायर फर्म पर छापेमारी की गई.
बताया जा रहा है कि इंजेक्शन की सप्लाई कोटा की स्थानीय फर्म मैसर्स राजस्थान मेडिकल हॉल के जरिए की गई थी. जब्त किए गए इंजेक्शनों में 2,479 नए अस्पताल के औषधि भंडार से, 72 जेके लोन अस्पताल से और 950 सप्लायर फर्म से बरामद किए गए हैं.
क्यो दिया जाता है ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन ?
गौरतलब है कि ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का इस्तेमाल प्रसव पीड़ा शुरू कराने और सिजेरियन डिलीवरी के बाद अत्यधिक रक्तस्राव रोकने के लिए किया जाता है. ऐसे में दवा की मात्रा शून्य होना बेहद गंभीर लापरवाही माना जा रहा है. फिलहाल इस मामले में औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 के तहत कार्रवाई की जा रही है और दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की तैयारी भी शुरू हो चुकी है.



